Last Updated: October 24, 2026

Dainik Savera Times Logo

आईपीएल पर सट्टा लगाने वाले 10 सदस्य पकड़े

April 23, 2026

आईपीएल पर सट्टा लगाने वाले 10 सदस्य पकड़े

सोनीपत। जिला पुलिस ने आईपीएल के मैच पर चल रहे ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़ किया है। थाना बहालगढ़ पुलिस और सीआईए-एक टीम ने संयुक्त दबिश देकर एक सोसायटी के फ्लैट से 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

फ्लैट नंबर 31 में चल रहा था ऑनलाइन सट्टा 

आरोपी सनराइजर्स हैदराबाद और दिल्ली कैपिटल्स के मैच पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिये ऑनलाइन सट्टा चला रहे थे। मौके से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद हुए हैं। पुलिस टीम कुमासपुर चौक जीटी रोड पर गश्त कर रही थी। तभी मुखबिर से सूचना मिली कि एपेक्स ग्रीन सोसायटी के टावर-सी फ्लैट नंबर इकतीस में ऑनलाइन सट्टा चल रहा है। सूचना पुख्ता मानकर पुलिस ने तलाशी वारंट लेकर दबिश दी। फ्लैट के अंदर से सट्टे की बातचीत सुनाई दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों कमरों में एक साथ प्रवेश कर आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपी लाइव मैच पर दांव लगा रहे थे और फोन के जरिये अन्य लोगों को भी जोड़ रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों में नीरज, साहिल, सचिन, कबीर, राहुल, संदीप, नमन, नवीन, दीपक और नीतिश शामिल हैं।

लंबे समय से सक्रिय था गिरोह

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और फर्जी सिम कार्ड तथा सरकार द्वारा बंद की गई वेबसाइटों का उपयोग करता था। लोगों को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर सट्टे में फंसाया जाता था। पुलिस ने कई लैपटॉप, महंगे मोबाइल फोन, टैबलेट और वाई-फाई राउटर जब्त कर सील कर दिए हैं। उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और हरियाणा पब्लिक जुआ रोकथाम कानून के तहत मामला दर्ज किया है। अब पुलिस गिरोह के वित्तीय लेनदेन और अन्य राज्यों से जुड़े संपर्कों की जांच कर रही है। इस नेटवर्क के तार कई शहरों तक फैले हो सकते हैं।

नकली जीएसटी टीम बनाकर तीस करोड़ ठगी की कोशिश

सोनीपत। खुद को जीएसटी विभाग का अधिकारी बताकर ठगी करने की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोपियों ने तीस करोड़ रुपये के कथित घोटाले का डर दिखाकर एक व्यक्ति को निशाना बनाया, लेकिन वीडियो बनते ही मौके से फरार हो गए।

घटना राठधाना रोड स्थित निराकार सेवा संस्थान के बाहर की है। बुधवार शाम एक कार में सवार तीन से चार युवक पहुंचे और विकास नाम के व्यक्ति की गाड़ी रुकवा ली। आरोपियों ने खुद को जीएसटी इंस्पेक्टर बताते हुए कागजात मांगे। सभी सामान्य कपड़ों और चप्पल में थे, जिससे शुरू में ही संदेह हो गया।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जगह को संदिग्ध बताते हुए तीस करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले की बात कही और कार्रवाई की धमकी दी। उन्होंने दो हजार पच्चीस की एक कथित एफआईआर की कॉपी भी दिखाई, जो बाद में फर्जी निकली। आशंका है कि डर दिखाकर पैसे ऐंठने की योजना थी। स्थिति तब बदली जब नरेंद्र सिंह ने आरोपियों से पहचान पत्र मांगा और सीसीटीवी व मोबाइल से वीडियो बनानी शुरू कर दी। वीडियो बनते देख आरोपी घबरा गए और अपनी गाड़ी में बैठकर फरार हो गए। कार यूपी बत्तीस नंबर की बताई गई है।

पीड़ित पक्ष ने तुरंत एक सौ बारह नंबर पर कॉल कर सूचना दी, लेकिन पुलिस टीम मौके पर नहीं पहुंच सकी। घटना की वीडियो सुरक्षित रखी गई है। पीड़ित ने बताया कि पहले भी इसी तरह की कोशिश की जानकारी मिली थी। यह घटना फर्जी अधिकारी बनकर ठगी करने वाले गिरोह की सक्रियता दिखाती है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी अधिकारी की पहचान की पुष्टि जरूर करें। मामले में शिकायत मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ये भी देखें :

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें