
चरखी दादरी। गांव समसपुर में अब सब्र का बांध टूट चुका है। नशे के बढ़ते धंधे से परेशान ग्रामीण सड़कों पर हैं और बस स्टैंड संघर्ष का केंद्र है। इस गुस्से में ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है।
लोगों का आरोप है कि गांव की गलियों में खुलेआम बिक रहे नशे ने युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने प्रशासन के दावों की पोल खोलते हुए कहा कि पिछले साल जब हरियाणा के DGP यहां आए थे, तो जिले को “नशा मुक्त” घोषित करने का दावा किया था। जबकि हकीकत इसके इतर है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस केवल कागजों पर कार्रवाई दिखा रही है, जबकि गांव की गलियों में नशा बिक रहा है। गांव के सुनसान इलाकों में भारी संख्या में इस्तेमाल किए इंजेक्शन और सिरिंज देखे जा सकते हैं।
इस नशे के धंधे का शिकार हमारा भविष्य हो रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि 15 से 26 वर्ष की उम्र के युवा इसकी गिरफ्त में हैं। इससे न केवल परिवारों का भविष्य बर्बाद हो रहा है, बल्कि गांव का सामाजिक ताना-बाना भी खतरे में है। धरने पर बैठे लोगों ने एक सुर में कहा कि हम अपने बच्चों को इस तरह अपनी आंखों के सामने बर्बाद नहीं होने देंगे। SHO और SP को शिकायतें दी हैं, जिनमें नशा तस्करों के नाम तक शामिल थे, लेकिन पुलिस मूकदर्शक है।
पुलिस की ओर से इन सभी आरोपों को निराधार बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशा बेचने वालों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है और पुलिस अपना काम कर रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है कि जब तक समसपुर में नशे का कारोबार पूरी तरह से जड़ से खत्म नहीं हो जाता, तब तक यह धरना समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक सप्लाई बंद नहीं होगी, खरीदार आते रहेंगे। यह लड़ाई अब आर-पार की है।
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