शिमला। आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा आज ऐतिहासिक गेयटी थियेटर, शिमला में 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे। इस वर्ष राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस का विषय “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” रहा।
आयुष मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से एम्स आयुर्वेद की स्थापना के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं, जिसमें हिमाचल प्रदेश का नाम शीर्ष पांच प्रस्तावित राज्यों में शामिल किया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा इसके लिए लगभग 70 एकड़ भूमि उपलब्ध करवाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। लगभग 1000 करोड़ रुपये की प्रस्तावित परियोजना में करीब 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार कैबिनेट के माध्यम से प्रदान की गई है।
एम्स आयुर्वेद की स्थापना के लिए हमीरपुर जिला के नादौन क्षेत्र के धनेटा में भूमि उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव भेजा गया है। केंद्र सरकार से प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संस्थान स्थापित होने की उम्मीद है।
आयुष मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आयुष को राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि आयुर्वेद सहित विभिन्न आयुष पद्धतियों की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा और उपयोगी उपचार पद्धतियों का संरक्षण एवं संवर्धन करते हुए इन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ा जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में आयुष क्षेत्र के लिए 379 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत 60 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए गए हैं। यह प्रावधान प्रदेश में आयुष अधोसंरचना, स्वास्थ्य सेवाओं तथा मानव संसाधन को सुदृढ़ करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा की प्रदेश में आयुर्वेदा को संस्थागत ढंग से विकसित किया जा रहा है ताकि प्रदेश में पर्यटक यहाँ की सुंदरता के साथ-साथ आर्युवेद से होने वाले फायदों से भी परिचित हो सकें और हिमाचल की जड़ी बूटियों से बनने वाली औषधियों का ज्ञान प्राप्त कर सकें।
धनैटा में प्रस्तावित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के लिए प्रदेश सरकार ने पूरी की अपनी प्रतिबद्धताएं
आयुष मंत्री ने कहा कि हमीरपुर जिले के नादौन क्षेत्र के धनैटा में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) स्थापित करने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष रखा है। प्रस्तावित करीब 1,000 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए राज्य सरकार ने 300 करोड़ रुपये की अपनी हिस्सेदारी देने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अतिरिक्त संस्थान के लिए लगभग 70 एकड़ भूमि तथा आवश्यक अधोसंरचना एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने की भी प्रतिबद्धता प्रदेश सरकार ने पूरी की है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्ताव से संबंधित आवश्यक प्रतिबद्धताएं पूरी कर दी गई हैं और अब संस्थान की स्थापना का निर्णय भारत सरकार के स्तर पर होना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रस्ताव को सकारात्मक रूप से मंजूरी मिलेगी, जिससे हिमाचल प्रदेश में आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तथा नवाचार को नई गति मिलेगी।
प्रदेश में करीब 1,241 आयुष संस्थानों का नेटवर्क
आयुष मंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 1,241 आयुष संस्थानों का व्यापक नेटवर्क कार्यरत है। सरकार द्वारा राज्य के सभी क्षेत्रों में आयुष सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता और उपयोगिता को और बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंचकर्म, योग तथा विभिन्न विशिष्ट आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ये सेवाएं न केवल स्वास्थ्य एवं निवारक चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर भी सृजित कर सकती हैं।
आयुष मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक वातावरण, समृद्ध औषधीय पादप संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान की उपलब्धता के कारण राज्य को आयुष आधारित वेलनेस, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं तथा वेलनेस पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं।

14 आयुर्वेदिक अस्पतालों में पंचकर्म तकनीशियन प्रशिक्षण
आयुष मंत्री ने कहा कि प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में 14 आयुर्वेदिक अस्पतालों में एक वर्षीय पंचकर्म तकनीशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से लगभग 250 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षित युवाओं को अस्पतालों, वेलनेस सेंटरों तथा पर्यटन एवं वेलनेस क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
उन्होंने आयुष उत्पादों की गुणवत्ता, मानकीकरण और नवाचार पर भी बल दिया। उन्होंने हिमोशधाम जैसी पहल का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास हिमाचल प्रदेश के आयुर्वेदिक उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिलाने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, औषधीय पौधों की खेती तथा उभरती वेलनेस अर्थव्यवस्था के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने में सहायक होंगे।
आयुष मंत्री ने आयुष क्षेत्र से जुड़े चिकित्सकों एवं अन्य पेशेवरों का आह्वान किया कि वे पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें तथा जन विश्वास को बनाए रखते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण आयुष सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में योगदान दें।
रिज मैदान पर तीन दिवसीय प्रदर्शनी में आयुर्वेद की विशिष्ट विधाओं का प्रदर्शन
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयुष विभाग द्वारा शिमला के रिज मैदान पर 23 से 25 सितंबर, 2026 तक तीन दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है जोकि तीनो दिन आम जनता के लिए खुली रहेगी।। प्रदर्शनी में आयुर्वेद की “विशिष्ट विधाओं” को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी का उद्देश्य आयुर्वेद को केवल उपचार पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण, रोग निवारण, जीवनशैली, आहार और समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण की व्यापक पद्धति के रूप में जनसामान्य तक पहुंचाना है।
प्रदर्शनी में मर्म चिकित्सा, अग्निकर्म, रक्तमोक्षण एवं जलौका अवचारण, नाड़ी परीक्षण, प्रकृति परीक्षण, पंचकर्म, योग, आहार-विहार एवं आयुर्वेदिक जीवनशैली, आयुर्वेदिक आहार, हिमोशधाम एवं इसके आयुर्वेदिक उत्पाद तथा हर्बल गार्डन एवं औषधीय पौधों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में आमजन को आयुष विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों के साथ संवाद करने तथा विभिन्न आयुर्वेदिक पद्धतियों के सिद्धांत एवं उपयोग को समझने का अवसर मिल रहा है। प्रदर्शनी में विशेष रूप से आहार, जीवनशैली, निवारक स्वास्थ्य और समग्र स्वास्थ्य के माध्यम से दैनिक जीवन में आयुर्वेद की प्रासंगिकता को दर्शाया जा रहा है।
जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए दो विशेष सेल्फी प्वाइंट भी स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा आगंतुकों के लिए सार्वजनिक संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से लोग आयुर्वेदिक सिद्धांतों एवं स्वस्थ जीवनशैली को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प ले रहे हैं।
आयुष सेवाओं के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि
सचिव आयुष ए. शैनामोल ने विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रदेश में आयुष सेवाओं का बढ़ता उपयोग राज्य में आयुष नेटवर्क के विस्तार और लोगों की आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बढ़ती सहभागिता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में आयुष ओपीडी में उपचार लेने वाले मरीजों की संख्या वर्ष 2021-22 में लगभग 25.30 लाख से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 36.94 लाख हो गई है। इसी अवधि में आयुर्वेदिक अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या भी लगभग 3.56 लाख से बढ़कर 6.74 लाख हुई है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पंचकर्म, क्षारसूत्र, मर्म चिकित्सा, अग्निकर्म तथा जलौका चिकित्सा जैसी विशिष्ट सेवाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप 123 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को NABH मान्यता प्राप्त हुई है। उन्होंने विभाग की प्रमुख पहलों में हिमोशधाम, मातृ संजीवनी प्रसवोत्तर देखभाल पहल तथा पंचकर्म तकनीशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी उल्लेख किया।

आयुष विभाग की गतिविधियों और उपलब्धियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित
निदेशक आयुष रोहित जम्वाल ने स्वागत संबोधन में आयुष मंत्री सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों, प्रतिभागियों एवं हितधारकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा पिछले एक वर्ष के दौरान प्रदेश में आयुष अधोसंरचना, स्वास्थ्य सेवाओं, विशिष्ट उपचार पद्धतियों, मानव संसाधन तथा जन जागरूकता गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष आयुर्वेद दिवस समारोहों में जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। रिज मैदान पर आयोजित प्रदर्शनी के माध्यम से आम नागरिकों को आयुर्वेद के विभिन्न आयामों को प्रत्यक्ष रूप से समझने और जानने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” विषय पारंपरिक ज्ञान को समकालीन स्वास्थ्य सेवाओं, निवारक स्वास्थ्य, वेलनेस और स्वस्थ जीवन शैली के साथ जोड़ने के विभाग के प्रयासों को प्रतिबिंबित करता है। राज्य स्तरीय समारोह के दौरान हिमोशधाम वेलनेस पैक तथा आयुष विभाग की नई वेबसाइट का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर स्मारिका का विमोचन तथा विभाग की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया।
समारोह में NABH से मान्यता प्राप्त आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, मान्यता प्राप्त नर्सरी संचालकों तथा प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा औषधीय पौधों की खेती और आयुष उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से किसानों एवं उद्योग प्रतिनिधियों के बीच एमओयू हस्ताक्षर समारोह भी आयोजित किया गया।
विभाग ने आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के नेटवर्क को और मजबूत करने, विशिष्ट सेवाओं का विस्तार करने, कुशल मानव संसाधन विकसित करने, निवारक स्वास्थ्य एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने तथा प्रदेश के समृद्ध औषधीय पादप संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और वेलनेस की संभावनाओं का प्रभावी उपयोग कर स्वस्थ भविष्य के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
📍 Location: शिमला (शिमला)
मेष: दिन शुभ रहेगा...