हिमाचल डेस्क: अब उद्योगों से निकलने वाला दूषित पानी साफ किया जा सकेगा। इसके लिए चीड़ की सूखी पत्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा। NIT हमीरपुर के विशेषज्ञों ने चीड़ की पत्तियों से कार्बन आधारित फोटो कैटलिस्ट तैयार किया है, जो केवल सूर्य की सामान्य रोशनी में पानी को साफ कर देगा।
ये भी पढ़ें: हिमाचल के लड़के ने फिलीपींस की लड़की से रचाई शादी, सऊदी अरब में हुई थी मुलाकात
यह तकनीक सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल भी है। NIT हमीरपुर के रसायन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जय प्रकाश और शोधार्थी साहिल ठाकुर ने इस नवाचार के तहत ग्रीन कैमिस्ट्री की अवधारणा को आगे बढ़ाया है। यह शोध विश्वस्तरीय अमेरिकन कैमिकल सोसायटी के प्रतिष्ठित लैंगम्योर जर्नल में प्रकाशित हुआ है और हमीरपुर में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इसे सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र के रूप में चुना गया।
पारंपरिक फोटो कैटलिस्ट प्रायः मेटल ऑक्साइड और सल्फाइड रासायनिक पदार्थों से बनाए जाते हैं। ये पानी को शुद्ध तो करते हैं लेकिन इसके साथ ही पर्यावरण को कुछ हद तक नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं NIT हमीरपुर के विशेषज्ञों ने चीड़ की पत्तियों से कार्बन बेस्ड फोटो कैटलिस्ट तैयार किया है, जो केवल प्राकृतिक है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा।
ये भी पढ़ें: NSA अजीत डोभाल का बड़ा बयान, देश में 2013 के बाद कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं…
रमन स्पैक्टो स्कोपी से पानी का टेस्ट
पानी कितना दूषित है। इसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञों ने रमन स्पैक्टो स्कोपी उपकरण का इस्तेमाल किया है। कार्बन बेस्ड फोटो कैटलिस्ट को दूषित पानी में मिलाकर इसकी जांच स्पैक्टो स्कोपी से आसानी से हो सकेगी। इसके बाद इस पानी को स्वच्छ बनाने के लिए जरूरी मात्रा में फोटो कैटलिस्ट का प्रयोग कर इसे साफ किया जा सकेगा।