Last Updated: October 13, 2026

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हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी: राज्यपाल

October 13, 2026

हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी: राज्यपाल

शिमला। राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक जीवनशैली के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया है। उन्होंने लोगों से घरों में अपनी स्थानीय बोलियों का प्रयोग करने, पारंपरिक त्योहारों को गर्व के साथ मनाने और युवा पीढ़ी को प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति से जोड़ने की अपील की।

राज्यपाल बीती रात शिमला के ऐतिहासिक गैटी थियेटर में दो दिवसीय नाट्य समारोह के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध लेखक एसआर हरनोट के उपन्यास ‘हिडिंब’ पर आधारित नाटक ‘मुखौटासुर’ देखा। चंद्रनाहन रंगमंच, रोहड़ू के कलाकारों ने इस नाटक का मंचन किया।

राज्यपाल ने नाटक के निर्देशक कृष्ण भारती और पूरी कलाकार टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रस्तुति हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी होने के साथ-साथ समाज के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों को भी उजागर करती है। नाटक में माता हिडिंबा की कथा के माध्यम से पर्यावरण के बढ़ते दोहन, सांस्कृतिक मूल्यों के क्षरण और युवाओं में नशे की बढ़ती समस्या पर प्रभावशाली संदेश दिया गया।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। प्रदेश के जंगलों, पहाड़ों और नदियों की रक्षा के साथ स्थानीय बोलियों, लोक परंपराओं, त्योहारों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों को भी संरक्षित करना आवश्यक है। उन्होंने नाटक में हिमाचली लोकगीतों, स्थानीय बोलियों और पारंपरिक सांस्कृतिक तत्वों के समावेश की विशेष रूप से सराहना की।

राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करना भी जरूरी है। उन्होंने मिशन लाइफ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलों का जिक्र करते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बताया।

राज्यपाल ने लोगों से जंगलों, नदियों और पहाड़ों को स्वच्छ रखने तथा युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने एसआर हरनोट के उपन्यास ‘हिडिंब’ को हिमाचल से बाहर भी मिली अकादमिक पहचान की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने चंद्रनाहन रंगमंच, नाटक की पूरी टीम और हिमालयन लिटरेचर, कल्चर एंड एनवायरनमेंट फोरम, शिमला को आयोजन के लिए बधाई दी।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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