हिमाचल डेस्कः प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले चरण का मतदान 26 मई को होगा। चुनाव के लिए पोलिंग पार्टियों और मत पेटियों की आवाजाही सुनिश्चित करने हेतु राज्य निर्वाचन आयोग ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) से 400 बसों की मांग की है। हालांकि, एचआरटीसी प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि बसों की बुकिंग तभी की जाएगी, जब कुल राशि का 50 प्रतिशत अग्रिम भुगतान किया जाएगा। निगम ने इसके पीछे संशोधित नियमों का हवाला दिया है।
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बस बुकिंग पर आएगा करीब 7 करोड़ रुपये का खर्च
जानकारी के अनुसार, चुनावी ड्यूटी के लिए बसों की बुकिंग पर लगभग 7 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए आयोग से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये अग्रिम जमा कराने को कहा गया है। निर्वाचन आयोग ने एचआरटीसी को भेजे पत्र में यह भी आग्रह किया है कि चुनावी ड्यूटी में लगाई जाने वाली बसें अच्छी स्थिति में हों, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
24 और 25 मई को रवाना होंगी पोलिंग पार्टियां
पहले चरण का मतदान 26 मई को होना है। इससे पहले 24 और 25 मई को पोलिंग पार्टियों को विभिन्न मतदान केंद्रों के लिए रवाना किया जाएगा। मतदान समाप्त होने के बाद यही बसें मत पेटियों को लेकर वापस लौटेंगी।
बसों की कमी से लोगों को हो सकती है परेशानी
चुनावी ड्यूटी में बड़ी संख्या में एचआरटीसी बसों के लगने से आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। निगम पहले से ही बसों की कमी से जूझ रहा है और कई रूट प्रभावित होने की आशंका है। अक्सर तकनीकी खराबी के कारण बसें बीच रास्ते में भी खराब हो जाती हैं। ऐसे में एक साथ 400 बसों के चुनावी कार्य में लगने से नियमित सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
तीन चरणों में होंगे पंचायत चुनाव
राज्य में कुल 31,182 पदों के लिए पंचायत चुनाव तीन चरणों में कराए जाएंगे। प्रदेश की 3,754 पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, बीडीसी और जिला परिषद पदों के लिए मतदान होगा।
पहला चरण : 26 मई
दूसरा चरण : 28 मई
तीसरा चरण : 30 मई
मतदान वाले दिन ही मतगणना की जाएगी और प्रधान, उपप्रधान व वार्ड सदस्यों के परिणाम उसी दिन घोषित कर दिए जाएंगे।
2024 में बदले गए थे बस बुकिंग के नियम
एचआरटीसी ने 3 नवंबर 2024 को बस बुकिंग नियमों में बदलाव किया था। नए नियमों के तहत किसी भी समारोह, कार्यक्रम या रैली के लिए बसें तभी उपलब्ध कराई जाएंगी, जब कुल भुगतान का 50 प्रतिशत अग्रिम जमा कराया जाए। पहले सरकारी कार्यक्रमों और चुनावी रैलियों के लिए बसें बिना अग्रिम राशि के भेज दी जाती थीं, लेकिन भुगतान में लंबे समय तक देरी होने से निगम को वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ता था।
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