हिमाचल डेस्कः प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को मिलने वाली निशुल्क बस सेवा अब पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त नहीं रहेगी। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को पहले 236 रुपये खर्च कर हिम बस पास बनवाना अनिवार्य होगा, तभी उन्हें बस में निशुल्क यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक करीब 8.50 लाख विद्यार्थी पढ़ते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं दूर-दराज के क्षेत्रों से एचआरटीसी बसों के माध्यम से स्कूल आते-जाते हैं। अब इन सभी विद्यार्थियों को हिम बस पास बनवाना जरूरी होगा। पास के लिए लोकमित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन करने पर विद्यार्थियों को अतिरिक्त 40 रुपये की फीस भी देनी होगी।
निशुल्क बस सेवा के लिए शुल्क अनिवार्य किए जाने से गरीब परिवारों के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। सरकारी स्कूलों के छात्रों को कई वर्षों से यह सुविधा मिलती आ रही है। अब एचआरटीसी को घाटे से उबारने के नाम पर लागू की गई इस नई व्यवस्था से लाखों परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। निगम ने इसे ऑनलाइन सुविधा के रूप में लागू किया है, लेकिन इसका सबसे अधिक असर गरीब परिवारों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रदेश सरकार दशकों से गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए मुफ्त परिवहन सुविधा, फ्री वर्दी और नाममात्र की फीस जैसी योजनाएं चलाती रही है। लेकिन अब वर्दी योजना में बदलाव के बाद और एचआरटीसी की नई ऑनलाइन व्यवस्था के चलते अभिभावकों को बस पास बनवाने के नाम पर अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ेगी। इसे लेकर अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि कई ऐसे परिवार हैं जो यह राशि देने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। कुछ बच्चों को मजबूरी में कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ सकता है।
पहले निशुल्क बनते थे बस पास
पहले सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के बस पास निशुल्क बनाए जाते थे। स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों के पहचान पत्र संबंधित डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधकों के कार्यालय में भेजता था, जहां काउंटर साइन करके पहचान पत्र वापस भेज दिए जाते थे। लेकिन नई व्यवस्था में विद्यार्थियों के अभिभावकों को ऑनलाइन आवेदन कर हिम बस पास बनवाना होगा। 31 मार्च के बाद पास नहीं बनवाने वाले विद्यार्थियों को निशुल्क बस सुविधा नहीं मिलेगी।
अभिभावकों ने जताई नाराजगी
छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा का कहना है कि एचआरटीसी को घाटे से उबारने के नाम पर प्रदेश सरकार गरीब विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। उनका कहना है कि निगम को घाटे से उबारने के लिए सरकार को अतिरिक्त बजट का प्रावधान करना चाहिए, न कि आम जनता से इस तरह राशि वसूलनी चाहिए। साथ ही सरकार और अधिकारियों को अपनी फिजूलखर्ची पर भी रोक लगानी चाहिए।
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