शिमला : हिमाचल प्रदेश में सडक़ निर्माण, शहरी विकास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात कर विकास के आधुनिक मॉडलों पर विस्तृत चर्चा की। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम मानी जा रही इस बैठक में दोनों राज्यों की जनकल्याणकारी योजनाओं, स्मार्ट शहरी मॉडल्स, सड़क निर्माण तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ।
खास बात यह रही कि हिमाचल में बेहतर और टिकाऊ सड़क नेटवर्क तैयार करने के लिए कर्नाटक में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों पर विशेष फोकस किया गया। सूत्रों के अनुसार विक्रमादित्य सिंह ने कर्नाटक में सडक़ निर्माण और रखरखाव के उन मॉडलों की जानकारी ली, जिनकी बदौलत वहां कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में तेज़ गति से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हुआ है। हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन तकनीकों को प्रदेश में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
बैठक के दौरान विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार विकास कार्यों में नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सडक़ों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक बनाने के लिए अन्य राज्यों के सफल मॉडल्स का अध्ययन किया जा रहा है। लोक निर्माण मंत्री ने संकेत दिए कि जल्द ही हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग और शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल कर्नाटक भेजा जाएगा। यह टीम वहां के शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, सडक़ निर्माण तकनीक, स्मार्ट सिटी मॉडल और ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके बाद हिमाचल के लिए एक विशेष रोडमैप तैयार किया जाएगा।
बैठक में दोनों राज्यों के बीच विकास योजनाओं के अनुभव साझा करने और सफल मॉडलों को लागू करने पर सहमति बनी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि हिमाचल और कर्नाटक दोनों राज्यों की कई योजनाएं जनहित में बेहतर परिणाम दे रही हैं और इनका पारस्परिक अध्ययन आम लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि विकास के क्षेत्र में राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने से बेहतर प्रशासनिक मॉडल तैयार किए जा सकते हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ हुई चर्चा में शहरी विकास, अधोसंरचना विस्तार और आधुनिक निर्माण तकनीकों पर विस्तार से विचार किया गया।