Last Updated: November 6, 2026

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हिमकेयर जांच पर जयराम ठाकुर का सरकार पर हमला, बोले- नकली दवा रैकेट की जांच से क्यों पीछे हटी विजिलेंस

September 14, 2026

हिमकेयर जांच पर जयराम ठाकुर का सरकार पर हमला, बोले- नकली दवा रैकेट की जांच से क्यों पीछे हटी विजिलेंस

शिमला: शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमकेयर को बदनाम करने के नाम पर सरकार द्वारा जाँच का नाटक किया जा रहा है, वहीं प्रदेश में नकली ड्रग्स के रैकेट की विजिलेंस की जाँच पर एंटी करप्शन डिपार्टमेंट असमर्थता जता रहा है। जबकि जाँच की आवश्यकता माननीय न्यायालय द्वारा जताई जा रही है? क्या प्रदेश की एजेंसी जाँच में असमर्थ है या सरकार की इच्छा जाँच की है ही नहीं?

आख़िर विजिलेंस द्वारा लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले नकली दवाओं के रैकेट के ख़िलाफ़ जाँच में असमर्थता जताने और हिमकेयर के मामले में दिखाई गई तत्परता ही असली व्यवस्था परिवर्तन है? जहाँ मुख्यमंत्री द्वारा अपनी एक भी लोकप्रिय योजना चलाने में नाकाम रहने पर पूर्व सरकार की सर्वकालिक लोकप्रिय योजना को बदनाम किया जा सके। या फिर इस जाँच की असमर्थता में तकनीकी और वित्तीय ज्ञान की कमी के पीछे कोई और मंशा है?

जयराम ठाकुर ने कहा कि एक दवा निर्माता द्वारा नकली दवा की बिक्री और जीएसटी चोरी के लिए रिकॉर्ड में हेराफेरी के आरोप का मामला सामने आया। इसी मामले में न्यायालय में एक और प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ, जिसमें कथित रूप से 27 से 28 टन कच्चे माल की अवैध सप्लाई और जीएसटी चोरी का मामला भी सामने आया। इस मामले में भी विस्तृत जाँच की माँग की गई। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि भाजपा नेताओं और मुख्यमंत्री के राजनैतिक विरोधियों के ख़िलाफ़ युद्ध स्तर पर मुक़दमा दर्ज कर प्रदेश भर के कार्यालयों में बुला-बुलाकर पूछताछ करने और जाँच पूरी हुए बिना ही जाँच के तथ्यों को प्रेस रिलीज़ के माध्यम से सार्वजनिक करने वाली विजिलेंस इतने बड़े मामले की जाँच से ही किनारा कर लिया?

आख़िर कौन-सी तकनीकी और वित्तीय ज्ञान के अभाव में विजिलेंस और प्रदेश के डीजीपी को यह पत्र लिखना पड़ा। अगर जीएसटी और नकली दवाओं की चोरी का तकनीकी ज्ञान विजिलेंस और पुलिस डिपार्टमेंट के पास नहीं है तो सर्जरी की टेबल पर विशेषज्ञ डॉक्टर्स द्वारा लिए गए फैसले की समीक्षा करने का ज्ञान कहाँ से आ गया? दुर्लभ कैंसर के पेशेंट को परिस्थिति और डायग्नोस्टिक के आधार पर दी गई दवाओं के लिए कैसे जाँच कर रही है? यह जाँच सिर्फ मुख्यमंत्री के द्वारा बोले गए झूठ को जस्टिफाई करने के लिए की जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने 01 जुलाई 2026 को पत्र भेजकर इस मामले की जाँच में अपनी असमर्थता जताई थी। ब्यूरो का कहना था कि मामले की वित्तीय प्रकृति काफी जटिल है और उसके पास पर्याप्त मैनपावर, संसाधन तथा राजस्व विभाग से जुड़े तकनीकी और डोमेन ज्ञान का अभाव है। ऐसे में इतनी व्यापक वित्तीय हेराफेरी की जाँच करना उसके लिए मुश्किल है। यह व्यवस्था परिवर्तन वाली सरकार की सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार को उजागर करने वाली सरकार की हकीकत है, जिसे अब प्रदेश के लोगों ने पहचान लिया है। पहले भी संगठित भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय की संलिप्तता का मामला सामने आ चुका है। जिस पर बार-बार सवाल उठाने पर भी मुख्यमंत्री खामोश रहते हैं।

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