शिमला : राजधानी शिमला में पहाड़ी पर फैले कोर इलाकों में अब नए निर्माण कार्य नहीं हो सकेंगे। ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में करीब डेढ़ साल पहले मिली सीमित निर्माण की राहत अब समाप्त होने जा रही है। प्रदेश मंत्रिमंडल से शिमला के कोर एरिया को दोबारा ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी अंतिम के बाद अधिसूचना का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इसके लागू होने के बाद इन क्षेत्रों में निजी स्तर पर नए भवनों के निर्माण पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। इस फैसले से हजारों निजी भू-स्वामियों पर सीधा असर पड़ेगा, जिन्हें शिमला विकास योजना-2041 के तहत स्व-उपयोग के लिए सीमित निर्माण की अनुमति दी गई थी।
सरकार का कहना है कि बढ़ते निर्माण, वाहनों का दबाव, भूस्खलन की घटनाएं और पर्यावरणीय चुनौतियां शिमला की वहन क्षमता पर गंभीर असर डाल रही हैं। ऐसे में शहर के हरित क्षेत्रों और ऐतिहासिक स्वरूप को बचाने के लिए कोर एरिया में निर्माण गतिविधियों पर सख्ती जरूरी हो गई है। दूसरी ओर, जमीन मालिक इस फैसले को अपने संपत्ति अधिकारों पर सीधा प्रहार बताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और निजी अधिकारों के बीच बहस एक बार फिर तेज होने के आसार हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल निजी निर्माण पर लागू होगा। सरकारी अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और अन्य सार्वजनिक हित के भवनों के निर्माण के साथ-साथ पुराने भवनों के मूल स्वरूप के अनुरूप पुनर्निर्माण को इस प्रतिबंध से छूट रहेगी।सूत्रों के मुताबिक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) विभाग इस सप्ताह मसौदा अधिसूचना जारी करेगा। इसके बाद एक माह तक लोगों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों को सरकार के समक्ष रखा जाएगा, जिसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में निजी जमीन रखने वाले लोगों का कहना है कि सरकार बार-बार नियम बदल रही है। पहले विकास योजना-2041 के तहत निर्माण की अनुमति दी गई और अब उसे वापस लिया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे न केवल उनकी जमीन का उपयोग प्रभावित होगा बल्कि संपत्ति का बाजार मूल्य भी घटेगा। शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि कोर एरिया में अनियंत्रित निर्माण पर रोक लगाना शहर के भविष्य के लिए जरूरी कदम है। उनका कहना है कि शिमला की वहन क्षमता लगातार प्रभावित हो रही है और हरित क्षेत्रों का संरक्षण समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी के अधिकारों का हनन करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए शिमला के पर्यावरण, प्राकृतिक स्वरूप और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखना है। उन्होंने लोगों से मसौदा अधिसूचना पर अपने सुझाव और आपत्तियां निर्धारित समय के भीतर देने की अपील भी की। बता दें जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में हिमाचल प्रदेश कैबिनेट ने शिमला के सबसे भीड़भाड़ वाले कोर एरिया के अधिकांश हिस्से को दोबारा ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों, अनियंत्रित निर्माण और ट्रैफिक के अत्यधिक दबाव के कारण शहर की ऐतिहासिक पहचान को बचाने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है।
शिमला के कोर एरिया में सबसे पहले दिसंबर 2000 पर्यावरण बचाने के लिए 17 ग्रीन बेल्ट को नो-कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया गया था। फिर नवंबर 2017 एनजीटी ने शहर के कोर और ग्रीन एरिया में नए निर्माण पर पूरी तरह रोक लगा दी थी और अन्य क्षेत्रों में भी ऊंचाई सीमित की। जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एनजीटी यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का फैसला पलटने के बाद निर्माण को कुछ शर्तों के साथ अनुमति मिली थी, और नए ग्रीन बेल्ट भी जोड़े गए। लेकिन बीती जुलाई में राज्य मंत्रिमंडल ने बढ़ते कंक्रीट के जंगल व पर्यावरणीय संकट के चलते शिमला के भीड़भाड़ वाले कोर एरिया को दोबारा ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब इसे सख्ती से लागू करने की बात है।
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