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अवैध कॉलोनियों पर सरकार कसेगी शिकंजा, इंटीग्रेटेड कॉलोनाइजर एक्ट 2026 किया जाएगा लागू

Illegal colonies

Illegal colonies

Illegal colonies: मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़ा कदम उठाते हुए अवैध कॉलोनियों, फर्जी प्लॉटिंग और रियल एस्टेट क्षेत्र में होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लगाने की तैयारी में है। इसके तहत जल्द ही इंटीग्रेटेड कॉलोनाइजर एक्ट 2026 लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य संपत्ति खरीदने वाले लोगों को अधिक सुरक्षा और पारदर्शिता प्रदान करना है।

नए कानून के लागू होने के बाद राज्य में बिना अनुमति के कॉलोनी विकसित करना आसान नहीं रहेगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से उन मामलों पर प्रभावी रोक लगेगी, जिनमें लोग अपनी जीवनभर की बचत लगाकर प्लॉट खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि कॉलोनी को आवश्यक सरकारी मंजूरी ही प्राप्त नहीं है।

वैध कॉलोनी की होगी डिजिटल पहचान
इंटीग्रेटेड कॉलोनाइजर एक्ट 2026 के तहत राज्य की प्रत्येक वैध कॉलोनी को एक ‘यूनिक आईडी नंबर’ जारी किया जाएगा। इस आईडी के माध्यम से खरीदार ऑनलाइन पोर्टल पर कॉलोनी की वैधता की जांच कर सकेंगे। इससे संपत्ति खरीदने से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करना आसान होगा और फर्जी परियोजनाओं की पहचान भी संभव हो सकेगी।

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केवल रजिस्ट्री से नहीं चलेगा काम
अब तक संपत्ति की रजिस्ट्री को ही स्वामित्व की सुरक्षा का प्रमुख आधार माना जाता था, लेकिन नई व्यवस्था में केवल रजिस्ट्री कराना पर्याप्त नहीं होगा। रजिस्ट्री प्रक्रिया को कॉलोनी के स्वीकृत ले-आउट और सरकारी अनुमतियों से जोड़ा जाएगा। यदि किसी कॉलोनाइजर के पास आवश्यक मंजूरियां नहीं होंगी तो रजिस्ट्री पोर्टल उस परियोजना को स्वीकार नहीं करेगा।

कलेक्टर को मिलेगी जिम्मेदारी
नए कानून के तहत प्रत्येक जिले के कलेक्टर को नोडल अथॉरिटी की भूमिका सौंपी जाएगी। वे अवैध कॉलोनियों की निगरानी और जांच करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर अवैध निर्माण कार्य को रोकने, उसे ध्वस्त करने और संबंधित कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जा सकेगी।

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अवैध प्लॉटिंग पर होगी सख्ती
अब बिना अनुमति कृषि भूमि को छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर बेचने की प्रवृत्ति पर भी सख्ती दिखाने का फैसला सरकार ने किया है। किसी भी जमीन पर प्लॉटिंग शुरू करने से पहले भूमि डायवर्जन और ले-आउट स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया जाएगा।

खरीदारों को मिलेगा भरोसा और सुरक्षा
सरकार ने दावा किया है कि इस कानून के लागू होने के बाद संपत्ति खरीदारों को मानसिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर राहत मिलेगी। सभी स्वीकृत कॉलोनियों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से लोगों को बुनियादी सुविधाओं और वैधता संबंधी जानकारी के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

 

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