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भारतीय निशानेबाजी कोच जसपाल राणा का निधन, 12 की उम्र में पहला पदक

jaspal rana

नई दिल्ली। मशहूर भारतीय निशानेबाजी कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। राणा एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता हैं और ओलंपिक में दो बार पदक जीत चुकीं स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच भी रह चुके हैं। राणा ने 49 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि जर्मनी से लौटने के बाद अचानक ही उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

मनु भाकर को जिताए थे दो पदक

जसपाल राणा एक दिग्गज भारतीय खेल निशानेबाज (शूटर) और राष्ट्रीय कोच थे। उन्हें हाल ही में 2024 पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर को दो कांस्य पदक जिताने में अहम भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। वे राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के सबसे सफल खिलाड़ी रहे हैं, जिन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 के खेलों में कुल 15 पदक (9 स्वर्ण) जीते हैं। वे मनु भाकर के अलावा सौरभ चौधरी और अनीश भनवाला जैसे युवा निशानेबाजों के मेंटर और जूनियर राष्ट्रीय कोच भी रहे। उन्हें 2025 में 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए भारतीय टीम का हाई-परफॉर्मेंस कोच भी नियुक्त किया गया था। भारतीय निशानेबाजी में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्म श्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

12 की उम्र में जीता पहला मेडल

जसपाल राणा का जन्‍म 28 जून 1976 को उत्‍तराखंड के उत्‍तरकाशी में एक गढ़वाली परिवार में हुआ। उनके पिता नारायण सिंह राणा 1971 युद्ध के वेटरन हैं, जिन्‍होंने इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस में सेवा की और बाद में 2000 में उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री बने। उनके पिता निशानेबाजी खेल में दिलचस्‍पी रखते थे और वो जसपाल के पहले कोच भी हैं। जसपाल के दो भाई-बहन सुषमा सिंह (राणा) और सुभाष राणा हैं। दोनों ही काफी अच्‍छे निशानेबाज रहे।

अभिनव बिंद्रा ने लिखा भावुक संदेश

साल 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भारत को शूटिंग का पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा ने जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने सोशल प्लेटफॉर्म X पर लिखा- “जसपाल के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं. वे मेरे टीम मेट रहे हैं और भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली पीढ़ी के अहम सदस्य थे. वह बेहद प्रतिभाशाली और जुनूनी खिलाड़ी थे, जो हर बार रेंज पर उतरते समय देश का गौरव अपने साथ लेकर चलते थे. उनका जाना भारतीय खेल जगत, खासकर निशानेबाजी के लिए बड़ी क्षति है. मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों, शिष्यों और उन सभी लोगों के साथ हैं, जिनके जीवन को उन्होंने छुआ और प्रेरित किया.”

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