Last Updated: September 30, 2026

Dainik Savera Times Logo

विदेशों का रुख कर रहे भारतीय, पिछले पांच सालों में इतने लोगों ने छोड़ी नागरिकता

December 13, 2025

विदेशों का रुख कर रहे भारतीय, पिछले पांच सालों में इतने लोगों ने छोड़ी नागरिकता

नेशनल डेस्क: देश में पिछले पांच सालों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ दी है। सरकार की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 से 2024 के बीच कुल 8,96,843 भारतीयों ने अपनी नागरिकता त्याग दी। यह जानकारी केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

सरकारी आंकड़ों से यह साफ होता है कि 2022 के बाद नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या में तेजी आई है। साल 2022 में सबसे ज्यादा लोगों ने नागरिकता छोड़ी। उस वर्ष 2,25,620 भारतीयों ने नागरिकता त्याग दी। इसके बाद 2023 में 2,16,219 और 2024 में 2,06,378 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी। वहीं 2020 में यह संख्या 85,256 और 2021 में 1,63,370 रही।

ये भी पढ़ें: 15 हजार फीट की ऊंचाई पर प्लेन में फंसा स्काइडाइवर का पैराशूट, वीडियो देख थमी सबकी सांसे

सरकार ने यह भी बताया कि इससे पहले 2011 से 2019 के बीच 11,89,194 भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी थी। इन वर्षों में हर साल एक लाख से ज्यादा लोगों ने देश की नागरिकता त्यागी। इनमें 2011 में 1,22,819, 2012 में 1,20,923, 2013 में 1,31,405, 2014 में 1,29,328, 2015 में 1,31,489, 2016 में 1,41,603, 2017 में 1,33,049, 2018 में 1,34,561 और 2019 में 1,44,017 लोग शामिल थे।

झूठे नौकरी ऑफर्स के जाल में फंसे भारतीय

विदेश राज्य मंत्री ने संसद को यह भी बताया कि सरकार ने सोशल मीडिया के जरिए फैलाए जा रहे फर्जी नौकरी ऑफर्स पर गंभीरता से संज्ञान लिया है। कई फर्म दक्षिण एशियाई देशों में अच्छी नौकरी का लालच देकर भारतीयों को फंसा रही थीं। बाद में इन लोगों से वहां साइबर क्राइम और अन्य फर्जी गतिविधियों से जुड़े स्कैम सेंटर्स में जबरन काम करवाया जा रहा था।

सरकार की सक्रिय कार्रवाई के चलते अब तक करीब 6,700 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। विदेश मंत्रालय लगातार ऐसे मामलों पर नजर रख रहा है और विदेशी सरकारों के साथ मिलकर कार्रवाई कर रहा है।

विदेशों में रह रहे भारतीयों से 16 हजार से ज्यादा शिकायतें

2024-25 के दौरान विदेशों में रह रहे भारतीयों से जुड़ी शिकायतों को लेकर भी सरकार ने जानकारी दी। विदेश मंत्रालय को इस अवधि में कुल 16,127 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 11,195 शिकायतें ‘मदद’ पोर्टल के माध्यम से और 4,932 शिकायतें सीपीग्राम्स के जरिए दर्ज कराई गईं।

सबसे ज्यादा संकट से जुड़े मामले सऊदी अरब से सामने आए, जहां से 3,049 शिकायतें मिलीं। इसके बाद यूएई (1,587), मलेशिया (662), अमेरिका (620), ओमान (613), कुवैत (549), कनाडा (345), ऑस्ट्रेलिया (318), ब्रिटेन (299) और कतर (289) का नंबर रहा।

प्रवासी भारतीयों की मदद के लिए मजबूत व्यवस्था

सरकार ने बताया कि प्रवासी भारतीयों की समस्याओं के समाधान के लिए एक मजबूत और बहु-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। इसमें 24×7 इमरजेंसी हेल्पलाइन, वॉक-इन सुविधा, सोशल मीडिया के जरिए सहायता और बहुभाषी सपोर्ट शामिल है।

अधिकतर मामलों को भारतीय मिशनों द्वारा सीधे संवाद, नियोक्ताओं से बातचीत और स्थानीय प्रशासन से समन्वय कर जल्दी सुलझा लिया जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में देरी की वजह अधूरी जानकारी, नियोक्ताओं का सहयोग न करना या अदालत में लंबित मामले होते हैं।

मंत्री ने बताया कि जरूरत पड़ने पर भारतीय दूतावास पैनल वकीलों के जरिए कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराते हैं, जिसका खर्च इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड से उठाया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रवासी कामगारों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र और कांसुलर कैंप लगातार काम कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें: UP Magh Mela 2026: प्रयागराज माघ मेले 2026 की तैयारी शुरू, 15 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें