नेशनल डेस्क: दिल्ली के चर्चित कंझावला हिट एंड रन मामले में रोहिणी कोर्ट ने मृतका अंजलि के परिवार को 36 लाख 69 हजार 700 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि यह दुर्घटना आरोपी अमित खन्ना की लापरवाही के कारण हुई थी। यह फैसला 27 अक्टूबर को जिला न्यायाधीश (MACT) विक्रम ने सुनाया। आदेश में कहा गया कि बीमा कंपनी बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को 30 दिनों के भीतर यह रकम जमा करनी होगी।
कोर्ट ने साफ कहा कि हादसे के वक्त आरोपी अमित खन्ना के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। ऐसे में बीमा कंपनी को पहले मुआवजा देना होगा लेकिन बाद में उसे यह रकम अमित खन्ना और वाहन मालिक लोकेश प्रसाद शर्मा से वसूलने का अधिकार रहेगा। CCTV फुटेज से गाड़ी की पहचान और ड्राइवर की लापरवाही साफ साबित होती है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि मुआवजे की रकम पर 7.5% सालाना ब्याज भी दिया जाए, जो 3 अप्रैल 2023 से लागू होगा।
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हादसे की रात क्या हुआ था?
यह दर्दनाक घटना 31 दिसंबर 2022 की रात और 1 जनवरी 2023 की सुबह के बीच हुई थी। अंजलि अपनी स्कूटी से घर लौट रही थी, तभी शनी बाजार रोड पर एक ग्रे रंग की बलेनो कार ने उसकी स्कूटी को पीछे से टक्कर मार दी। उस दौरान अंजलि की दोस्त निधि भी उसके साथ थी। निधि ने बताया कि वह टक्कर लगते ही गिर गई लेकिन अंजलि कार के नीचे फंस गई। कार सवार युवक अंजलि को कई किलोमीटर तक कंझावला-कुतुबगढ़ रोड तक घसीटते रहे, जब तक पुलिस पहुंची, अंजलि की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। पुलिस को वहां से स्कूटी के टूटे हिस्से, एक काला जूता, स्कार्फ और ईयरपॉड बरामद हुए थे।
जांच और अदालत की सुनवाई
पुलिस जांच में यह साबित हुआ कि हादसे के समय अमित खन्ना ही कार चला रहा था और उसी की लापरवाही से अंजलि की मौत हुई। पुलिस ने उस पर IPC की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) और 304A (लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत चार्जशीट दाखिल की। अंजलि की मां रेखा देवी ने अपनी दो बेटियों और एक छोटे बेटे के साथ मिलकर अदालत में मुआवजे की याचिका दायर की थी। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि अंजलि की कमाई से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं किए गए थे। फिर भी परिवार की आर्थिक स्थिति और परिस्थितियों को देखते हुए मुआवजा तय किया गया।
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आरोपी का दावा
रक्षा पक्ष ने दलील दी थी कि अंजलि शराब के नशे में थी और FSL रिपोर्ट में उसके शरीर में अल्कोहल की मात्रा पाई गई। लेकिन अदालत ने कहा कि इससे आरोपी की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। नशे में होना किसी व्यक्ति को दूसरे की जान लेने का अधिकार नहीं देता।
आगे की कार्यवाही
इस मामले में आपराधिक मुकदमा अभी भी रोहिणी कोर्ट में जारी है और प्रॉसिक्यूशन एविडेंस (गवाहों के बयान) का चरण चल रहा है। अदालत ने मुआवजा आदेश को लेकर कहा कि यह राहत परिवार की आर्थिक मदद के लिए है, जबकि दोष तय करने की प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी।