Kejriwal asked, ‘Who are you : नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के दौरे पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से दिए एक बयान पर केजरीवाल के जवाब ने बवाल मचा दिया है। सनातन धर्म पर की टिप्पणी और उस पर आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया के बाद भाजपा और आप के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
इस विवाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर नई बहस को जन्म दे दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि राहुल गांधी, अखिलेश यादव और केजरीवाल को हिंदू धर्म को कमजोर नहीं समझना चाहिए कि लोग उनकी बातों में आ जाएंगे। जब आपके लोग हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करते हैं, तब आप लोग मौन साधे रहते हैं। सनातन का अपमान उत्तर प्रदेश और देश की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। हमने अपनी विरासत को संजोया है, जिसके लिए हमारे पुरखों ने कुर्बानियां दी हैं।”
नबीन का यह बयान सीधे तौर पर इंडिया गठबंधन के नेताओं की विचारधारा पर प्रहार था। इस बयान के वायरल होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर तीन शब्दों में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नितिन नबीन को टैग करते हुए सवाल किया कि आप कौन हैं? केजरीवाल के इस सवाल ने भाजपा खेमे को और अधिक आक्रामक बना दिया। भाजपा नेता प्रवेश वर्मा, जिन्होंने पूर्व में विधानसभा चुनावों में केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा संभाला था, कटाक्ष करते हुए लिखा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष तो बहुत बड़ी बात है, मैं याद हूं कि नहीं?
इसके बाद विवाद और गहरा गया जब भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने केजरीवाल को पुरानी हार की याद दिलाते हुए लिखा कि उस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, जिसने तुम्हें नई दिल्ली विधानसभा से हराया था और फिर तुम पंजाब भाग गए थे। कुछ याद आया? मालवीय का यह बयान सीधे केजरीवाल की राजनीतिक रणनीति और उनके दिल्ली से पंजाब के सफर पर एक बड़ा तंज माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में सनातन और हिंदू पहचान के इर्द-गिर्द बुना गया यह बयान भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
राजनीतिक विश्लेषक नवीन गौतम कहते हैं कि भाजपा यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि विपक्ष का मौन हिंदू विरोधी एजेंडे का समर्थन है। आम आदमी पार्टी ने इस बहस में उलझने के बजाय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधकर यह दिखाने की कोशिश की है कि वे इन बयानों को गंभीरता से नहीं लेते। हालांकि, भाजपा नेताओं की तरफ से आए बयानों ने दिल्ली की राजनीति में पुराने घावों को फिर से हरा कर दिया है। अमित मालवीय और प्रवेश वर्मा का आक्रामक रुख यह स्पष्ट करता है कि आगामी दिनों में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच ‘सनातन’ और ‘राजनीतिक कद’ को लेकर यह घमासान और तेज होने वाला है।
भाजपा का मानना है कि अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगी जब भी धर्म पर विवादित टिप्पणियां होती हैं, तो चुप्पी साध लेते हैं, जो जनता को स्वीकार्य नहीं है। वहीं, आम आदमी पार्टी इस पूरे मामले को ध्यान भटकाने की राजनीति बता रही है। इस डिजिटल वार ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया अब राजनीतिक अखाड़ों का सबसे प्रमुख हिस्सा बन चुका है, जहां एक छोटे से ट्वीट या कमेंट से बड़े राजनीतिक आंदोलन और आरोप-प्रत्यारोप की नींव रखी जाती है।
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