नई दिल्ली [भारत]: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को बताया कि उसने दुबई (संयुक्त अरब अमीरात) में स्थित 18 अचल संपत्तियों – जिनमें बुर्ज खलीफ़ा के अपार्टमेंट भी शामिल हैं – और नई दिल्ली में स्थित दो अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। इन संपत्तियों का बाज़ार मूल्य लगभग 1700 करोड़ रुपये है।
कुर्क की गई अन्य विदेशी संपत्तियां दुबई के प्रमुख स्थानों पर स्थित हैं। इनमें महंगे और आलीशान विला, दुबई हिल्स एस्टेट (जिसमें हिल्स व्यू, फेयरवे रेजिडेंसी और सिदरा शामिल हैं) के अपार्टमेंट, तथा बिजनेस बे और SLS होटल व रेजिडेंसी में स्थित कई हाई-एंड अपार्टमेंट शामिल हैं।
ED ने एक बयान में कहा, “कुर्की के लिए चुनी गई ये संपत्तियां सौरभ चंद्राकर की हैं। सौरभ, ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ बेटिंग एप्लिकेशन के मुख्य प्रमोटरों में से एक है। ये संपत्तियां उसके द्वारा नियंत्रित संस्थाओं, तथा उसके सहयोगियों – जिनमें विकास छपारिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन टिबरेवाल और सुरेंद्र बागड़ी शामिल हैं – के नाम पर दर्ज हैं।”
ED द्वारा की गई जांच से पता चला है कि इन संपत्तियों को ‘अपराध से अर्जित आय’ (Proceeds of Crime) से खरीदा गया था। यह आय ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ प्लेटफॉर्म और कई अन्य प्लेटफॉर्म के नाम पर चलाए जा रहे अवैध ऑनलाइन बेटिंग (सट्टेबाजी) के संचालन से जुड़े सूचीबद्ध अपराधों को अंजाम देकर जुटाई गई थी।
ED ने छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल की पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई FIRs के आधार पर जांच शुरू की थी। ये FIRs IPC, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत उन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थीं, जो ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ और ‘स्काई एक्सचेंज’ जैसे अवैध ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े थे, तथा इनमें कुछ सरकारी अधिकारी भी शामिल थे।
ED की जांच से यह खुलासा हुआ है कि ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ एक बड़े पैमाने पर संचालित होने वाले अंतरराष्ट्रीय बेटिंग सिंडिकेट के रूप में काम करता था। यह सिंडिकेट ‘टाइगर एक्सचेंज’, ‘Gold365’ और ‘Laser247’ जैसे कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डोमेन नामों के माध्यम से अवैध सट्टेबाजी की सुविधा प्रदान करता था।
ED ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन को “पैनलों” या “शाखाओं” के एक फ्रेंचाइजी-आधारित नेटवर्क के ज़रिए संचालित किया जाता था। इन पैनलों को पूरे भारत में फैले सहयोगियों द्वारा चलाया जाता था, जबकि इसके मुख्य प्रमोटर – सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल – दुबई से बैठकर इस पूरे बेटिंग सिंडिकेट को संचालित और नियंत्रित करते थे।
एजेंसी ने बताया, “जांच में आगे पता चला कि प्रमोटरों ने बेटिंग पैनल से होने वाले मुनाफे का लगभग 70-75% हिस्सा अपने पास रख लिया, जबकि बाकी हिस्सा उन पैनल ऑपरेटरों में बांट दिया गया जो बेटिंग के काम को संभाल रहे थे।”
शेड्यूल्ड अपराधों से कमाए गए ‘अपराध से प्राप्त धन’ (PoC) को हज़ारों ‘म्यूल्स’ या नकली बैंक खातों के ज़रिए सुनियोजित तरीके से घुमाया गया; ये खाते उन लोगों के KYC दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके खोले गए थे जिन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
इसके बाद, ED ने बताया कि इस अवैध पैसे को हवाला चैनलों, क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन और जटिल वित्तीय तरीकों के ज़रिए भारत से बाहर भेजा गया, और आखिरकार UAE और भारत में कीमती चल और अचल संपत्तियों में निवेश किया गया।
अब तक, ED ने इस मामले के सिलसिले में पूरे देश में 175 से ज़्यादा जगहों पर तलाशी अभियान चलाए हैं। इसके अलावा, इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और रायपुर की विशेष अदालत (PMLA) में दायर पांच ‘अभियोजन शिकायतों’ में 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
साथ ही, ED ने बताया कि ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018’ के तहत सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, अनिल अग्रवाल उर्फ अतुल अग्रवाल और शुभम सोनी के खिलाफ आवेदन दायर किए गए हैं, ताकि उन्हें ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किया जा सके और उनकी संपत्तियों को ज़ब्त किया जा सके। आज की तारीख तक, चल और अचल संपत्तियों की कुल कुर्की, ज़ब्ती और फ्रीज़िंग का मूल्य 4,336 करोड़ रुपये है।
ED ने कहा कि वह पूरे अवैध बेटिंग सिस्टम और उसके अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क को खत्म करने और जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। एजेंसी अवैध बेटिंग के काम से कमाए गए ‘अपराध से प्राप्त धन’ का पता लगाने और उसे ज़ब्त करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है।
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