Manisha’s Death Case : भिवानी। बेटी मनीषा को इंसाफ दिलाने की लड़ाई अब एक पिता के दर्द और संकल्प की कहानी बन चुकी है। अपनी बेटी को खोने का गम दिल में लिए एक पिता पिछले कई महीनों से न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन जब हर दरवाजे पर निराशा हाथ लगी तो उसने अपनी आखिरी लड़ाई खुद लड़ने का फैसला कर लिया।
सोमवार को वह आमरण अनशन की अनुमति लेने डीसी कार्यालय पहुंचा, मगर अधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बावजूद उसके हौसले नहीं डिगे। पिता ने साफ शब्दों में कहा कि अनुमति मिले या न मिले, कोई साथ आए या न आए, वह 29 जून को डीसी कार्यालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठेगा। अब यह सिर्फ एक मामले की जांच नहीं, बल्कि एक पिता की उस पुकार की लड़ाई बन गई है जो अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहा है।
भिवानी जिला के ढाणी लक्ष्मण गांव निवासी 19 वर्षीय मनीषा बीते साल 11 अगस्त को लापता हुई थी। दो दिन बाद 13 अगस्त को खेतों में उसका शव मिला था। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी और पुलिस पर समय रहते तलाश न करने के आरोप लगाए। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ा की परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया। आनन फानन में लोहारू थाना के सभी कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया। एसपी का तबादला किया गया। पर परिवार ने शव नहीं लिया। गांव में महापंचायत चलती रही।
कई दिन बीत जाने पर सरकार ने केस सीबीआई को दिया तो परिजनों ने मनीषा का 21 अगस्त को अंतिम संस्कार किया। केस सीबीआई को जाने के बाद सीबीआई टीम कई बार गांव जाकर परिजनों और केस से जुड़े संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर चुकी है। वहीं अब 10 माह से भी ज्यादा समय बीत चुका है। अब तक ना कोई खुलासा और ना कोई गिरफ्तारी हुई है। इससे गुस्साए पिता ने 29 जून से भिवानी डीसी ऑफिस पर आमरण अनशन करने का बड़ा फैसला लिया है। पिता ने कहा कि मैं हर हाल में 29 जून को आमरण अनशन पर बैठूंगा। उन्होंने कहा कि कहा कि ये कोई शादी नहीं, मैंने किसी को अनशन पर आने का निमंत्रण नहीं दिया है। संजय का कहना है कि मुझे ही नहीं, सभी को पता है कि मनीषा ने सुसाइड नहीं किया। उसकी हत्या हुई है। पर 10 महीने होने के बाद भी ना सीबीआई और ना सरकार ने अभी तक बताया कि जांच कहां तक पहुंची, क्या सबूत या सुराग मिले हैं।
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