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Haryana News : हाईकोर्ट का फैसला, अब माइनिंग साइट्स की हर साल ड्रोन से मैपिंग

Police Crack Down on Illegal Mining

Police Crack Down on Illegal Mining

चंडीगढ़। हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए हैं कि हर साल माइनिंग साइटस की ड्रोन से मैपिंग होगी। ऐसा होने से अवैध खनन पर नजर रखी जा सकती। इससे अवैध खनन पर रोक भी लगेगी। ये भी कहा कि तकनीक सर्वेक्षण और रिकॉर्डिंग से ही इसे सही ढंग से पकड़ा और रोका जा सकता है।

हरियाणा सरकार ने ये की थी मांग

राज्य सरकार की ओर से दायर एफिडेविट में मांग थी कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की अनुमति दी जाए। इस पर जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। कहा कि मामला अत्यधिक तकनीकी प्रकृति का है और अवैध खनन की सीमा, पर्यावरणीय प्रभाव तथा वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ तकनीकी ज्ञान आवश्यक है।

मुख्य सचिव को दिए ये निर्देश

अदालत ने साफ कहा कि सेवानिवृत्त जज के पास जरूरी तकनीकी दक्षता होना आवश्यक नहीं, इसलिए इस प्रकार की जांच उनके नेतृत्व में कराना उचित नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह तुरंत आवश्यक आदेश जारी कर राज्य की सभी खनन साइट्स की वार्षिक ड्रोन मैपिंग सुनिश्चित करें। अदालत ने यह भी कहा कि हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए पूरे राज्य के खनन क्षेत्रों का वैज्ञानिक डेटा जुटा सकता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि राज्य सरकार की चिंता उचित है, लेकिन अवैध खनन की जांच का सबसे प्रभावी तरीका तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक परीक्षण ही है।

चरखी दादरी से जुड़ा था मामला

यह मामला चरखी दादरी जिले के पिचोपा कलां गांव में कथित अंधाधुंध अवैध खनन से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक खनन कर कृषि भूमि, पर्यावरण और गांव की पारिस्थितिकी को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया। राज्य सरकार ने बताया कि खान एवं भूविज्ञान विभाग के महानिदेशक पहले ही विस्तृत जांच रिपोर्ट दे चुके हैं, लेकिन स्वतंत्र तकनीकी जांच की जरूरत महसूस की गई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी।

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