Last Updated: September 21, 2026

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केरल के सबरीमाला मंदिर में घी बिक्री के नाम पर करोड़ों का घोटाला, हाईकोर्ट ने जांच के दिए आदेश

January 14, 2026

केरल के सबरीमाला मंदिर में घी बिक्री के नाम पर करोड़ों का घोटाला, हाईकोर्ट ने जांच के दिए आदेश

तिरुवनन्तपुरम: केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में अब तक कीमती चीजें चोरी की घटनाओं की खबरें आती थीं, लेकिन अब मंदिर के घी व्यापार में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप हैं कि मंदिर में घी की बिक्री के जरिए लाखों रुपए का गबन किया गया। इस गंभीर मामले की जांच के लिए केरल हाईकोर्ट ने राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन विभाग को एक महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

जानें क्या है पूरा मामला?

मंदिर प्रशासन के अनुसार, केवल दो महीने की अवधि में घी बिक्री के नाम पर लगभग 35 लाख रुपये का गबन हुआ। इस अनियमितता की जानकारी सबसे पहले मंदिर के विजिलेंस अधिकारी को लगी। इसके बाद इंटरनल ऑडिट में घोटाले की पूरी तस्वीर सामने आई। इस घोटाले के चलते त्रावणकोर देवस्सवोम बोर्ड (TDB) के काउंटर इंचार्ज सुनील पोट्टी को निलंबित कर दिया गया।

हाईकोर्ट ने इस मामले में मंदिर विजिलेंस कमिश्नर की रिपोर्ट का संज्ञान लिया और मामले की पूर्ण जांच करने का आदेश जारी किया।

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घी का कारोबार और गणित

सबरीमाला मंदिर में भगवान अय्यप्पा के दर्शन के लिए भक्त नारियल और घी चढ़ाते हैं। चढ़ाए गए इस घी को बाद में भक्तों को प्रसाद के रूप में “आथिया सिष्टम” के रूप में बेचा जाता है। यह TDB के लिए एक बड़ा राजस्व स्रोत है।

TDB के अनुसार, घी को 100 मिलीलीटर के पैकेट में पैक करने का काम कांट्रेक्टर द्वारा किया जाता है, लेकिन सारी सामग्री TDB की होती है। हर पैकेट बनाने के लिए कांट्रेक्टर को केवल 20 पैसे दिए जाते हैं, जबकि 100 मिलीलीटर घी की कीमत 100 रुपये रखी जाती है।

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हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन विभाग मामले की तह तक जाकर दोषियों का पता लगाएं और एक महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपें। मंदिर प्रशासन ने भी जांच में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।

कैसे हुआ गबन?

जांच में पता चला कि 17 नवंबर, 2025 से 26 दिसंबर, 2025 के बीच ठेकेदार ने कुल 3,52,050 पैकेट पैक किए। इसी अवधि में 89,300 पैकेट काउंटर से बेचे गए। इनमें से 143 पैकेट खराब पाए गए और 28 पैकेट काउंटर पर बाकी थे।

इस प्रकार, कुल 89,129 पैकेट की बिक्री से प्राप्त राशि बोर्ड को जमा करनी थी। लेकिन रिकॉर्ड के अनुसार, कर्मचारियों ने केवल 75,450 पैकेट की रकम जमा की। इसका मतलब हुआ कि 13,679 पैकेट, यानी लगभग 13.68 लाख रुपये, का गबन किया गया।

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