नेशनल डेस्क: संविधान दिवस 2025 के मौके पर पुराने संसद भवन में राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने की। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा के अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और दोनों सदनों के सांसद शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया समेत नौ भाषाओं में संविधान का ट्रांसलेटेड वर्जन जारी किया है।
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राष्ट्रपति ने संविधान का प्रियंबल पढ़ते हुए कहा कि हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर, अपनी संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि विश्व के विशालतम लोकतंत्र में आज भारत एक उदाहरण के तौर पर खड़ा है। मैं आप सभी सांसदों को बहुत-बहुत बधाई देती हूं। तीन तलाक जैसी सामाजिक कुरीति पर रोक लगाकर हमारी संसद ने बहन-बेटियों को न्याय दिलाया है। विकसित भारत का संकल्प जरूर पूरा होगा।
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आज के दिन ही पूरा हुआ था ड्राफ्ट बनाने का काम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह भी कहा कि आज ही के दिन यानि 26 नवंबर, 1949 को संविधान भवन के इसी सेंट्रल हॉल में संविधान सभा के सदस्यों ने भारत के संविधान का ड्राफ्ट बनाने का काम पूरा किया था। इसी दिन हम भारत के लोगों ने अपना संविधान अपनाया था। ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर हमारे संविधान के मुख्य आर्किटेक्ट में से एक थे।
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