Last Updated: October 7, 2026

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परिवार दिवस पर विशेष : मुश्किल समय है परीक्षा और परिवार उसका उत्तर

May 14, 2026

परिवार दिवस पर विशेष : मुश्किल समय है परीक्षा और परिवार उसका उत्तर

नई दिल्ली। टूटते रिश्तों की खामोशी जब जीवन में फैलती है, तो हर दिशा सूनी और अर्थहीन लगने लगती है। इंसान जीता तो है, पर भीतर से खाली हो जाता है।

परिवार ही हमारा अटूट आधार

15 मई, अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस, इसी सच को उजागर करता है कि परिवार ही वह अटूट आधार है, जो हमें स्थिरता देता है, कठिन समय में संभालता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा बनता है। यह दिन केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की जड़ों को मजबूत करने का आह्वान है। 1993 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसकी घोषणा का उद्देश्य भी यही था—परिवार बिखरा, तो समाज का संतुलन डगमगा जाएगा। आज बढ़ती असमानताओं के दौर में यह दिवस हमें चेताता है कि परिवार ही वह सुदृढ़ कवच है, जो बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखता है।

सदियों से बदल रही परिवार की संरचना

परिवार की संरचना सदियों से बदल रही है, लेकिन उसका मूल मर्म आज भी प्रेम, सहयोग और जिम्मेदारी ही है। 1980 के दशक से संयुक्त राष्ट्र ने पारिवारिक मुद्दों पर ध्यान दिया, जिसके चलते 1994 से यह दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन परिवारों को प्रभावित करने वाली सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय चुनौतियों की याद दिलाता है। आधुनिक युग में न्यूक्लियर परिवार बढ़े हैं, फिर भी संयुक्त परिवार की गर्मजोशी कई संस्कृतियों में बरकरार है। भारत में जहां ‘परिवार’ शब्द ही संस्कृति का पर्याय है, यह दिवस हमें सिखाता है कि परिवार सिर्फ रक्त के रिश्ते नहीं, बल्कि भावनात्मक बंधन है। 2026 की थीम “परिवार, असमानताएँ और बाल कल्याण” दर्शाती है कि सशक्त परिवार ही समानता और बच्चों के सुरक्षित भविष्य का मार्ग बनाते हैं।

विकास की पहली पाठशाला हमारा परिवार

परिवार व्यक्ति के विकास की पहली पाठशाला है, जहाँ बच्चा भाषा के साथ संस्कार, नैतिकता और संघर्ष की क्षमता सीखता है। शोध बताते हैं कि मजबूत पारिवारिक सहारे वाले बच्चे चुनौतियों का सामना अधिक दृढ़ता से करते हैं। चंद्रयान-3 मिशन के दौरान वैज्ञानिकों के परिवारों ने लगातार समर्थन देकर लंबे कार्यदबाव में उनका मनोबल बनाए रखा—यह परिवार की अदृश्य शक्ति का उदाहरण है। परिवार आत्मविश्वास का आधार है, जो गिरने पर संभालता है और डर में हिम्मत देता है। इसके अभाव में बच्चे अकेलेपन और मानसिक तनाव से जूझ सकते हैं। इसलिए परिवार दिवस हर बच्चे के लिए इस सहारे की आवश्यकता याद दिलाता है।

परिवार में रहते संकट भी बन जाता मौका

दौड़ती-भागती आधुनिक जिंदगी ने परिवारों के सामने कई नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। शहरीकरण, काम का दबाव, सोशल मीडिया और आर्थिक असमानताएँ रिश्तों में दूरी बढ़ा रही हैं। कई माता-पिता रोज़गार के कारण बच्चों से दूर रहते हैं, जिससे भावनात्मक जुड़ाव कमजोर होता है। बढ़ती विषमताएँ गरीब परिवारों को शिक्षा और स्वास्थ्य से वंचित कर देती हैं। फिर भी कुछ परिवार इन हालात में मजबूत बनकर उभरते हैं। महामारी के दौरान कई परिवारों ने साथ रहकर संकट झेला—बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई की, माता-पिता ने घर से काम किया। यह दिखाता है कि एकजुट परिवार कठिन समय में बड़ी शक्ति बनता है। परिवार टूटने से समाज में अपराध, अवसाद और अस्थिरता बढ़ती है, जो विकास को भी प्रभावित करती है।

परिवारों पर ही टिकी राष्ट्र की नीव

राष्ट्र की नींव परिवारों पर ही टिकी होती है। सशक्त परिवार जिम्मेदार नागरिक गढ़ते हैं, जो देश के विकास में योगदान देते हैं। आर्थिक रूप से परिवार उपभोक्ता बनकर बाजार को गति देते हैं और मानव संसाधन भी तैयार करते हैं। बच्चों के कल्याण की शुरुआत परिवार से होती है—पोषण, शिक्षा और नैतिक दिशा यहीं मिलती है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टें बताती हैं कि परिवार-केंद्रित नीतियाँ सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार हैं। भारत में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान भी परिवारों की भागीदारी से सफल हुए हैं। स्पष्ट है, स्वस्थ परिवार ही स्वस्थ समाज बनाते हैं; अन्यथा असमानताएँ बढ़ती जाएँगी। परिवार दिवस हमें यही सिखाता है कि नीतियों में परिवार को प्राथमिकता दी जाए।

तुर्की-सीरिया में दिख चुकी परिवार की नीव

तुर्की और सीरिया के हालिया भूकंप ने दुनिया को यह दिखाया कि टूटते मलबे के बीच भी परिवार की डोर नहीं टूटती—माँ ने बच्चों को बचाने के लिए घंटों उन्हें अपनी बाहों में थामे रखा, यह दृश्य वैश्विक संवेदना का प्रतीक बना। इसी तरह केरल के निपाह संकट में अस्पताल में भर्ती माता-पिता ने दूरी के बावजूद बच्चों की पढ़ाई और मानसिक साहस बनाए रखने के लिए लगातार संपर्क साधा। भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में भी अनेक परिवार सीमित साधनों के बीच शिक्षा को प्राथमिकता देकर बच्चों का भविष्य संवारते हैं। ये घटनाएँ साबित करती हैं कि परिवार केवल सामाजिक इकाई नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रहने वाली गहरी भावनात्मक शक्ति है। मजबूत परिवार ही बच्चों को हर संकट में स्थिर रखते हैं और जीवन की हर परीक्षा के लिए तैयार करते हैं।

रोजाना मजबूत होती परिवार की डोर

रिश्तों की नींव छोटे रोज़मर्रा के प्रयासों से मजबूत होती है। परिवार को सशक्त बनाने के लिए व्यावहारिक कदम जरूरी हैं। माता-पिता बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएँ और संवाद को प्राथमिकता दें। सरकारें परिवार-समर्थक नीतियाँ जैसे मातृत्व अवकाश, बाल देखभाल और आर्थिक सहायता लागू करें। स्कूलों में परिवार शिक्षा शामिल हो ताकि संबंधों की समझ बढ़े। समुदाय स्तर पर ऐसे कार्यक्रम हों जहाँ परिवार अनुभव साझा कर सीखें। डिजिटल युग में सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग भी रिश्तों को जोड़ सकता है। इन प्रयासों से असमानताएँ घटेंगी और बच्चों का कल्याण मजबूत होगा। अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस केवल तिथि नहीं, बल्कि निरंतर सुधार का संकल्प है।

अंधकार के बीच प्रकाश है परिवार

अंधकार के बीच जो निरंतर स्थिर प्रकाश बनकर मार्ग दिखाता है, वह परिवार ही है। इस अवसर पर संकल्प होना चाहिए कि हर घर को सशक्त और संवेदनशील बनाया जाए, हर बच्चे को स्नेह, सुरक्षा और सम्मान मिले तथा समाज में एकता और भरोसा लगातार मजबूत हो। मजबूत परिवार ही मजबूत राष्ट्र और सुदृढ़ दुनिया की नींव बनते हैं। यह केवल भावनात्मक विचार नहीं, बल्कि व्यावहारिक सत्य है—जैसे गहरी और मजबूत जड़ें पेड़ को हर तूफान, आंधी और विपरीत परिस्थितियों में भी टिकाए रखती हैं। यह दिन हमें गहराई से याद दिलाता है कि परिवार की शक्ति को केवल समझना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में अपनाकर हर रिश्ते में सहेजना और आगे बढ़ाना ही सच्चा संकल्प है।
-कृति आरके जैन

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