नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें केंद्र सरकार तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पुलिस स्टेशनों और सार्वजनिक कार्यालयों में डिस्प्ले बोर्ड लगाने के निर्देश देने की मांग की गई है। इन बोडरें पर झूठी शिकायतें, मनगढ़ंत आरोप और झूठे सबूत दाखिल करने के दंडात्मक परिणामों की जानकारी प्रदर्शित करने का आग्रह किया गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।
पीठ ने कहा कि बंधुत्व का संवैधानिक सिद्धांत सामाजिक आचरण का मार्गदर्शन करे और झूठे मामलों के जरिए आपराधिक कानून का दुरुपयोग निदरेष नागरिकों के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। याचिका में पुलिस थानों, तहसील कार्यालयों, जिला न्यायालयों, पंचायत भवनों, नगरपालिका कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे बोर्ड लगाने, एफआईआर से पहले शिकायतकतार्ओं को कानूनी परिणाम बताने और उनसे सत्यापन हलफनामा लेने की मांग की गई है।
याचिका में अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा की रक्षा का हवाला देते हुए कहा गया है कि तुच्छ मुकदमेबाजी रोकने के लिए निवारक उपाय जरूरी हैं। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के आधार पर दोषसिद्धि और मामलों की संख्या में बड़े अंतर का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अध्याय 14 के बावजूद प्रभावी तंत्र के अभाव की बात कही गई है।

