अंबाला। The election bugle will sound todayप्रदेश का राज्य निर्वाचन आयोग आज यानी सोमवार को सात नगर निकायों में चुनाव और 540 पंचायतों में उपचुनाव कराने की घोषणा कर सकता है। सोमवार को आयोग की घोषणा के साथ चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी।
बता दें कि प्रदेश में तीन नगर निगमों पंचकूला, सोनीपत और अंबाला, एक नगर परिषद रेवाड़ी और तीन नगर पालिका सांपला, धारूहेड़ा नगर पालिका व उकलाना में चुनाव होने हैं। 540 नगर पंचायतों में जिला परिषद के 2, पंचायत समिति सदस्य के 11, सरपंच के 32 पंचों के 495 पदों पर उपचुनाव होगा। इसके अलावा नवगठित पंचायतों में हिसार की मंडी आदमपुर और जवाहर नगर और कैथल की पोलर व कोबिपुर पंचायत में भी चुनाव होने हैं। 6 निकायों में रिक्त 1-1 वार्ड के लिए उपचुनाव के लिए भी चुनाव घोषित हो सकते हैं।
आपको ये भी बता दें कि इन चुनावों के होने की दिसंबर 2025 से अटकलें लग रही थीं। एक-दो जिलों में आयोग की ओर से आरक्षण की घोषणा के बाद मामला हाईकोर्ट में चला गया था। दावेदार प्रत्याशियों का कहना था कि उनके निर्वाचन क्षेत्र बदलने की मंशा से सरकार ने ये फेरबदल किए हैं। इसलिए मामला कोर्ट में विचाराधीन था। इसकी घोषणा होने के साथ ही प्रत्याशियों के लिए रास्ता साफ हो जाएगा। यदि बात करें पंचकूला की तो यहां कुल 20 वार्ड (सीटें) हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार मानते हुए एससी वर्ग के लिए कुल 3 सीटें तय की गई हैं। नियमों के मुताबिक इन तीन सीटों में से 1 सीट अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित रखी गई है। इस अधिसूचना के बाद अब शहर में चुनावी सरगर्मियां तेज होने की उम्मीद है।
चुनाव की घोषणा का इंतजार कर रहे पंचकूला, अंबाला और सोनीपत नगर निगमों का रास्ता साफ हो गया है। अंबाला की बात करें तो यहां नगर निगम की कमान अधिकारियों के हाथ आ गई थी। तभी से तत्कालीन पार्षदों ने विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने के बयान देने शुरू कर दिए थे। निगम चुनाव होने के बाद प्रत्येक वार्ड में पार्षदों का चयन हो जाएगा। इसके बाद विकास कार्यों को भी सुचारू कर दिया जाएगा।
नगर निगम चुनाव के लिए सियासी पारा चरम पर है। शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सोमवार को जैसे ही चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा, राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर जाएंगे। इस बार मुकाबला सीधा और बेहद दिलचस्प रहने वाला है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा से पहले ही दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। वार्डबंदी पूरी होने के बाद पंचकूला की राजनीतिक बिसात पूरी तरह बदल चुकी है।
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