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गुरुवार का व्रत : केले के पत्ते का पूजन और लाभ

गुरुवार का व्रत : केले के पत्ते का पूजन और लाभ

गुरुवार का व्रत : केले के पत्ते का पूजन और लाभ

नई दिल्ली : मार्गशीर्ष माह की नवमी तिथि गुरुवार को आडल योग का संयोग बन रहा है। इस दिन सूर्य तुला राशि और चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेंगे। द्रिक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा, जबकि राहुकाल का समय दोपहर 1:26 बजे से 2:47 बजे तक रहेगा।

गुरुवार के दिन व्रत रखना और पूजा करना धार्मिक ग्रंथों में शुभ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आडल योग अशुभ योग है, इसलिए इस दिन सूर्य पुत्र की पूजा और विधिपूर्वक व्रत रखने से दुष्प्रभाव कम होते हैं। अग्नि पुराण में उल्लेख है कि इस दिन भगवान श्री हरि ने काशी में शिवलिंग की स्थापना की थी, जिससे गुरुवार व्रत का महत्व और बढ़ जाता है।

धर्मग्रंथों में बताया गया है कि गुरुवार का व्रत धन, समृद्धि, संतान सुख और मानसिक शांति दिलाने में सहायक होता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने, पीले फूल और फल दान करने की विशेष महत्वता है। साथ ही, भगवान विष्णु को हल्दी अर्पित करने से मनोकामना पूरी होती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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केले के पत्ते में भगवान विष्णु का वास माना जाता है, इसलिए गुरुवार को केले के पत्ते की पूजा की जाती है। जरूरतमंद या गरीब को अन्न और धन का दान भी पुण्यफल देता है। यह व्रत शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से शुरू कर 16 गुरुवार तक रखा जा सकता है, जिसके बाद उद्यापन कर पूर्ण किया जाता है।

गुरुवार व्रत के नियमों का पालन करने से घर में समृद्धि, सुख-शांति और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

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