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Harayna Baisakhi : जन-जन तक पहुंचाएंगे गुरु साहिबानों के सिद्धांत : नायब सैनी

April 13, 2026

Harayna Baisakhi : जन-जन तक पहुंचाएंगे गुरु साहिबानों के सिद्धांत : नायब सैनी

कुरुक्षेत्र। Will convey the principles of Guru Sahiban मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि देश और प्रदेश की सरकार गुरु साहिबानों के सिद्धांतों और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रही हैं।

ऐसा करके गुरु परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें बैसाखी पर्व भी शामिल है। हरियाणा की धरती को भी यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है कि इसका सिख इतिहास और गुरुओं की परंपरा से गहरा संबंध रहा है। लखनौर साहिब, जो श्री गुरु गोबिंद सिंह का ननिहाल था, आज भी उनकी स्मृतियों को संजोए है। हरियाणा के लोगों ने हमेशा सिख गुरुओं के आदर्शों को अपनाया है और उनके संघर्षों में बढ़-चढ़कर भाग लिया है।

महोत्सव में मुख्य अतिथि थे सैनी

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार को कुरुक्षेत्र के केडीबी मेला ग्राउंड में कला एवं सांस्कृतिक विभाग एवं जिला प्रशासन के तत्वाधान में आयोजित बैसाखी महोत्सव 2026 के राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यातिथि के रूप में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिख इतिहास पर आधारित व प्रदेश सरकार की उपलब्धियों व योजनाओं की प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने महिला व पुरुषों की दंगल प्रतियोगिता को शुरू करवाया और पतंग उड़ाकर अंतरराष्ट्रीय पतंग प्रतियोगिता का भी शुभारंभ किया। इसके साथ ही हरियाणवी संस्कृति पर आधारित हरियाणा विरासत पवेलियन का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सबसे पहले सब को बैसाखी के पावन पर्व की बधाई दी। इसके साथ ही खालसा पंथ के स्थापना दिवस पर महान गुरुओं के चरणों में नमन किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज को सिख संगत की तरफ से कृपाण, सरोपा तथा खंडा साहिब का मोमेंटो भेंट किया।

धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र की कर्मभूमि पर मनाया बैसाखी

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र की इस कर्मभूमि पर बैसाखी के पावन पर्व पर आप सबके बीच आकर बड़ी खुशी हो रही है। यह वह धरा है, जो धर्म और कर्म की धरती के रूप में जानी जाती है। उन्होंने कहा कि बैसाखी का यह उत्सव नई फसलों और नई उम्मीदों का त्योहार है। कुरुक्षेत्र की यह धरा बैसाखी के इस पावन अवसर पर आध्यात्मिक ऊर्जा व सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर है। यह त्योहार हमारी आस्था, परंपरा और इतिहास का जीवंत प्रतीक है। बैसाखी का पर्व हमें प्रकृति के साथ जुड़ने, श्रम के सम्मान को समझने और समृद्धि का उत्सव मनाने की प्रेरणा देता है। यह दिन किसानों के परिश्रम का उत्सव है, उनकी मेहनत का सम्मान है और उनकी खुशहाली का प्रतीक है। जब खेतों में लहराती फसलें पककर तैयार होती हैं, तो किसान का हृदय गर्व और आनंद से भर उठता है और उसी खुशी को हम सब मिलकर बैसाखी के रूप में मनाते हैं।

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बैसाखी में समेटे हैं महत्वपूर्ण अध्याय

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बैसाखी का यह पावन दिन हमारे इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय भी समेटे हुए है। वर्ष 1699 में इसी दिन आनंदपुर साहिब की पवित्र धरती पर दशम पातशाह सरबंसदानी श्री गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उस समय देश में अन्याय, अत्याचार और अधर्म अपने चरम पर था। ऐसे कठिन समय में गुरु साहिब ने खालसा पंथ की स्थापना करके समाज को एक नई दिशा दी। एक ऐसी दिशा, जिसमें साहस, समानता, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना थी।

बताई पांच प्यारों की भूमिका

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि खालसा पंथ की स्थापना के समय गुरु साहिब ने पांच प्यारों को चुना, जो विभिन्न जातियों और क्षेत्रों से थे। यह अपने आप में सामाजिक समानता और भाईचारे का एक अद्भुत संदेश था। एक ही बर्तन से अमृत पिलाकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि मानव-मानव में कोई भेद नहीं है। उन्होंने कहा कि बैसाखी का यह पावन पर्व हमें यह भी सिखाता है कि हम अपने जीवन में सकारात्मकता लाएं, अपने कर्तव्यों का पालन करें और समाज के उत्थान में अपना योगदान दें।

श्री नांदेड़ साहिब की यात्रा 5 मई को

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत भी तीर्थ यात्रा करवाई जाती है। इस योजना के तहत आगामी 5 मई को कुरुक्षेत्र से श्री नांदेड़ साहिब के लिए ट्रेन रवाना की जाएगी। इससे पहले गत 28 मार्च को 700 से ज्यादा श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शनों के लिए अंबाला से ट्रेन रवाना की गई थी। उन्होंने कहा कि बैसाखी का यह दिन हमें इतिहास के एक दर्दनाक, लेकिन प्रेरणादायक अध्याय की भी याद दिलाता है, 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में अंग्रेजी हुकूमत ने निर्दोष लोगों पर गोलियां चलाकर एक भीषण नरसंहार किया था।

सभी शहीदों को किया नमन

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम उन सभी शहीदों को श्रद्धा पूर्वक नमन करते हैं और उनके बलिदान को सदैव स्मरण रखने का संकल्प लेते हैं। दिसम्बर 2022 में हरियाणा सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति की स्थापना की गई। इससे सिक्खों की काफी समय से चली आ रही मांग को पूरा किया। इससे हरियाणा में सिख समुदाय को स्वायत्तता मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार ने गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व, गुरु गोबिंद सिंह के 350वें प्रकाश पर्व और गुरु तेग बहादुर के 400 वें प्रकाश वर्ष को राज्य स्तर पर भव्य रूप से मनाया है। गत नवंबर मास में श्री गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष में पूरे प्रदेश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए। उन्होंने कहा कि यही ज्योतिसर में 25 नवम्बर को श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजुरी में राज्य स्तरीय समागम आयोजित किया गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर को समर्पित सिक्के, डाक टिकट और कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया।

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