Last Updated: October 1, 2026

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पाकिस्तान में 125 साल पुराने गुरुद्वारे पर चला बुलडोजर, सिखों के विरोध के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई

June 30, 2026

पाकिस्तान में 125 साल पुराने गुरुद्वारे पर चला बुलडोजर, सिखों के विरोध के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई

Punjab News: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फारूखाबाद (मंडी चूहड़काणा) स्थित लगभग 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री सिंह सभा के एक हिस्से को ध्वस्त किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद स्थानीय सिख समुदाय में नाराजगी फैल गई। सिख संगत के विरोध जताने के बाद प्रदर्शन के चलते प्रशासन ने निर्माण और तोड़फोड़ का कार्य तत्काल रुकवाते हुए पूरे परिसर को सील कर दिया।

भूमाफिया पर कब्जे की कोशिश के आरोप

स्थानीय सिख संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि गुरुद्वारे की जमीन पर कब्जा करने की नीयत से लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। उनका कहना है कि कुछ वर्ष पहले भी गुरुद्वारे का मुख्य गुंबद क्षतिग्रस्त किया गया था, जिसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई थी। हालांकि, आरोप है कि उस समय प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐतिहासिक इमारत को पर्याप्त संरक्षण नहीं मिल सका।

चार साल पहले तक सुरक्षित थी इमारत

स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब चार वर्ष पहले तक गुरुद्वारा अपनी मूल ऐतिहासिक संरचना के साथ मौजूद था। उस दौरान सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो और तस्वीरें भी साझा की गई थीं, जिनमें इसकी वास्तुकला और धार्मिक महत्व स्पष्ट दिखाई देता था। इसके बाद धीरे-धीरे इमारत को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आने लगीं।

बंटवारे के बाद से खाली पड़ा था गुरुद्वारा

बताया जाता है कि वर्ष 1947 के विभाजन के बाद यह गुरुद्वारा नियमित धार्मिक गतिविधियों से लगभग खाली हो गया था। बाद में पाकिस्तान सरकार ने वर्ष 1960 में इस परिसर के कुछ हिस्सों को भारत से आए शरणार्थियों के आवास के लिए आवंटित किया था। नियमों के अनुसार, ऐतिहासिक इमारत के मूल स्वरूप में किसी भी प्रकार का बदलाव या तोड़फोड़ प्रतिबंधित थी।

विरोध के बाद रुका निर्माण कार्य

जैसे ही गुरुद्वारे के हिस्से को गिराए जाने की सूचना फैली, बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। समुदाय के विरोध और बढ़ते दबाव के बाद पुलिस और प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। फिलहाल परिसर पर ताला लगाकर उसे सील कर दिया गया है और किसी भी नए निर्माण या तोड़फोड़ पर रोक लगा दी गई है।

संरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप

ऐतिहासिक धरोहरों की देखरेख से जुड़े लोगों का कहना है कि संबंधित संपत्ति केवल रहने के उद्देश्य से आवंटित की गई थी। ऐसे में भवन की मूल संरचना में बदलाव या उसे गिराना नियमों के खिलाफ माना जाता है। इसके बावजूद इमारत का हिस्सा ध्वस्त किए जाने से संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

घटना के बाद विभिन्न सिख संगठनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक धार्मिक स्थल किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा होते हैं और उनका संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है।

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गुरुद्वारा सिंह सभा का ऐतिहासिक महत्व

इतिहास के अनुसार, जत्थेदार करतार सिंह झब्बर ने वर्ष 1912 में चूहड़काणा क्षेत्र में खालसा दीवान खरा सौदा बार की स्थापना की थी। बाद में वर्ष 1918 में गुरुद्वारा श्री सच्चा सौदा के निकट खरीदी गई भूमि पर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के अधीन एक मिडिल स्कूल भी शुरू किया गया, जिसका संचालन स्थानीय खालसा दीवान और मंडी चूहड़काणा कमेटी करती थी। गुरुद्वारे की दीवारों पर आज भी गुरमुखी में अंकित ऐतिहासिक शिलालेख इसकी प्राचीन विरासत और धार्मिक महत्व की गवाही देते हैं।

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