Last Updated: September 22, 2026

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पंजाब में भारी बारिश का कहर: ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थानीय प्रशासन अलर्ट

October 7, 2025

पंजाब में भारी बारिश का कहर: ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थानीय प्रशासन अलर्ट

तरनतारन: पंजाब में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है और इसके साथ ही ब्यास नदी का जलस्तर फिर से खतरे की ओर बढ़ चला है। पहाड़ी इलाकों में हो रही भारी बारिश के चलते पौंग डैम से छोड़े गए पानी ने ब्यास दरिया में उफान ला दिया है। शनिवार देर रात नदी के ऊपरी हिस्से में जहां 81 हजार क्यूसेक पानी दर्ज किया गया, वहीं निचले हिस्सों में 61 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे आसपास के गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।

किसानों की मेहनत पर फिरा पानी

पिछले कुछ हफ्तों से जलस्तर में गिरावट देखी जा रही थी, जिससे किसानों को थोड़ी राहत मिली थी। उन्होंने गेहूं की बुवाई की तैयारियां शुरू कर दी थीं और बड़ी-बड़ी मशीनों से खेतों में जमा हुई 5 से 8 फीट तक की रेत हटाई जा रही थी। लेकिन बीती रात नदी के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी ने उनकी मेहनत पर फिर से पानी फेर दिया। खेत एक बार फिर जलमग्न हो गए हैं और रेत की नई परत बिछ गई है।

फसल बर्बादी से गांवों में मायूसी

मंड क्षेत्र और इसके आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ब्यास नदी के किनारे बसे गांवों में हजारों एकड़ खेत पानी में डूब चुके हैं। गांव दीनेके के किसानों का कहना है कि अब गेहूं की बुवाई के लिए समय बेहद कम बचा है और मौजूदा हालात में दोबारा रेत हटाना और खेत तैयार करना लगभग असंभव लगता है।

मुआवजे को लेकर किसानों की मांग

प्रभावित किसानों ने राज्य सरकार से मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान में दिए जा रहे ₹20,000 प्रति एकड़ के मुआवजे से नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। किसानों की मांग है कि उन्हें ₹60,000 प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए, ताकि वे दोबारा फसल उगाने की दिशा में कदम उठा सकें।

स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर

हालांकि प्रशासन लगातार हालात पर नजर रखे हुए है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला ऐसे ही जारी रहा, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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