Last Updated: September 23, 2026

Dainik Savera Times Logo

645 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में ED ने चंडीगढ़ और पंजाब के 6 शहरों से 151.33 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त की

August 4, 2026

645 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में ED ने चंडीगढ़ और पंजाब के 6 शहरों से 151.33 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त की

चंडीगढ़: प्रवर्तन निदेशालय (ED), चंडीगढ़ ने ₹645 करोड़ के सरकारी फंड में धोखाधड़ी और मनी-लॉन्ड्रिंग के मामले में चंडीगढ़, मोहाली, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला और बठिंडा में ₹151.33 करोड़ की चल और अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से ज़ब्त किया है।

यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई। ज़ब्त की गई संपत्तियों में रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी, खेती की ज़मीन, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी, पार्टनरशिप के अधिकार, बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉज़िट और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं।

ED ने स्पेशल PMLA कोर्ट में 14 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ़ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दायर की है। जांच के दौरान, एजेंसी ने चार आरोपियों — ऋषभ ऋषि, अक्षय कुमार, विक्रम वाधवा और नरेश कुमार उर्फ ​​नरेश भवानी — को गिरफ्तार किया।

ED के अनुसार, यह जांच हरियाणा एंटी-करप्शन ब्यूरो, चंडीगढ़ पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की गई थी।

ये मामले कई सरकारी विभागों, सार्वजनिक संस्थाओं और प्राइवेट स्कूलों से जुड़े बैंक खातों से सरकारी फंड के कथित धोखाधड़ीपूर्ण डायवर्जन (हेराफेरी) से संबंधित हैं।

ED का आरोप है कि शेल कंपनियों और फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन के एक जटिल नेटवर्क के ज़रिए लगभग ₹645 करोड़ का डायवर्जन किया गया। कथित तौर पर फंड को कई खातों के ज़रिए घुमाया गया और बाद में महंगी प्रॉपर्टी और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया।

एजेंसी ने कहा कि इस कथित धोखाधड़ी में जाली फिक्स्ड डिपॉज़िट रसीदें, नकली RTGS और NEFT रिक्वेस्ट लेटर, मनगढ़ंत डेबिट नोट, जाली बैंक कम्युनिकेशन, झूठे बैंक स्टेटमेंट और हेरफेर किए गए बैंकिंग रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया।

कथित तौर पर यह रकम कई शेल संस्थाओं को ट्रांसफर की गई, जिनमें कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, RS ट्रेडर्स, SRR प्लानिंग ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड और मां वैष्णो लक्ष्मी इंटीरियर्स शामिल हैं।

ED के अनुसार, बाद में इस फंड को कई बैंक खातों के ज़रिए घुमाया गया और रिहायशी व कमर्शियल प्रॉपर्टी, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स, ज्वेलरी बिजनेस, रिटेल स्टोर और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया।

एजेंसी ने कहा कि चंडीगढ़ के रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा अपराध से हुई इस कथित कमाई के मुख्य लाभार्थियों में से एक थे। ज़ब्त की गई संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा वाधवा, उनके परिवार के सदस्यों, सहयोगियों और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़ा है।

ED ने कहा कि दूसरे लाभार्थियों की पहचान करने, पैसे के पूरे लेन-देन का पता लगाने और सरकारी कर्मचारियों व अन्य लोगों की कथित भूमिका की जांच करने का काम जारी है।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें