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बाढ़ प्रभावित किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी मान सरकार

October 28, 2025

बाढ़ प्रभावित किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी मान सरकार

पंजाब डेस्क: पंजाब के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने खुद ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर किसानों तक मदद पहुंचाने की शुरुआत की। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सात ट्रक गेहूं के बीजों से भरवाकर बाढ़ प्रभावित जिलों की ओर रवाना किए। ये ट्रक सिर्फ बीज नहीं, बल्कि लाखों किसानों के लिए उम्मीद और नई जिंदगी लेकर जा रहे है। दो लाख किंटल गेहूं के बीज जो 74 करोड़ रुपये की कीमत के हैं, पूरी तरह से मुफ्त दिए जा रहे है।

बाद जब पंजाब को तबाह किया था, तब किसानों की आंखों में सिर्फ आंसू थे। पांच लाख एकड़ में खड़ी फसल पानी में डूब गई। महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। कर्जे में डूबे किसानों के सामने आत्महत्या तक के ख्याल आने लगे थे। लेकिन सरकार ने समय रहते फैसला लिया और अब रबी की बुवाई से पहले ही किसानों के हाथों में बीज पहुंचाने का काम शुरू हो गया है ये बीज उन्हें बिना किसी कागजी कार्रवाई के सीधे उनके गांवों में मिलेंगे। मुख्यमंत्री सिंह भगवंत मान ने भावुक होकर कहा, “हमारे किसान इस देश की रीढ़ है। जब पूरा देश सोता है, तब भी किसान अपने खेतों में जागता है। उसकी मेहनत से ही देश का पेट भरता है। आज जब वो मुश्किल में है, तो हम कैसे पीछे हट सकते है? ये 74 करोड़ रुपये नहीं, ये हमारी सरकार का किसानों के प्रति सम्मान है।”

उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के किसानों ने हरित क्रांति में अहम भूमिका निभाई और देश को खाद्य सुरक्षा दी, अब उनकी मदद करना सरकार का फ़र्ज़ है। बाढ़ की तबाही का मंजर सुनकर रूह कांप जाती है। पूरे पंजाब में 2.300 से ज्यादा गांव पानी में डूब गए थे। 20 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए। सबसे दुखद बात यह रही कि 56 मासूम जाने चली गईं। करीब सात लाख लोग बेघर हो गए और उन्हें राहत शिविरों में रहना पड़ा। बच्चों की पढ़ाई छूट गई, बुजुर्गों को दवाइयां नहीं मिलीं, और औरतों को खाना बनाने तक की जगह नहीं मिली। यह आपदा पंजाब के इतिहास में सबसे भयानक थी।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बाढ़ का कहर टूटा। 3,200 सरकारी स्कूल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। 19 कॉलेज की इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं। लाखों बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई। वहीं, 1,400 क्लीनिक और अस्पतालश्री तबाह हो गए, जिससे मरीजों को इलाज के लिए दूर-दूर जाना पड़ा। कई गंभीर मरीजों की समय पर इलाज न मिलने से मौत भी हो गई। यह सिर्फ इमारतों का नुकसान नहीं था. बल्कि पूरी व्यवस्था ही ध्वस्त हो गई थी।

बुनियादी ढांचे का नुकसान देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि तबाही कितनी बड़ी थी। 8,500 किलोमीटर लंबी सड़कें पूरी तरह से बह गई या टूट गईं। 2,500 पुल गिर गए, जिससे गांवों का संपर्क शहरों से कट गया। राशन, दवाइयां और ज़रूरी सामान पहुंचाना मुश्किल हो गया। बिजली के खंभे गिरे, ट्रांसफॉर्मर जल गए, और हफ्तों तक अंधेरे में रहना पड़ा। नलों में पानी नहीं आया क्योंकि पंप खराब हो गए। जिंदगी पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गई
थी।

शुरुआती अनुमान के मुताबिक कुल नुकसान 13,800 करोड़ रुपये का है। लेकिन असली नुकसान इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। फसलों का नुकसान, इन सबका हिसाब मवेशियों की मौत, घरों का टूटना, दुकानों का बह जाना लगाना मुश्किल है। कई किसानों ने बताया कि उनकी पूरी जिंदगी की कमाई एक ही रात में बर्बाद हो गई। जिन्होंने बैंक से कर्ज लेकर खेती की थी, वे अब कर्ज़ चुकाने की स्थिति में नहीं है। सरकार ने इसलिए फैसला लिया कि तुरंत राहत पहुंचाई जाए।

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