चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में आज मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक विधेयक को पेश किया, जो धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी करने वालों को उम्रकैद तक की सजा देने का प्रावधान करता है। इस विधेयक के जरिए राज्य सरकार धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वालों पर पूरी तरह अंकुश लगाने की दिशा में एक ठोस कदम तैयार कर रही है।
विधानसभा में विधेयक पेश किए जाने के बाद विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने इस पर चर्चा के लिए समय मांगा, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवा ने घोषणा की कि इस अहम विधेयक पर विस्तार से चर्चा बुधवार को होगी।
मुख्यमंत्री मान की अध्यक्षता में आज सुबह उनके आवास पर हुई कैबिनेट बैठक में इस विधेयक को मंजूरी दी गई थी। इसके तुरंत बाद इसे विधानसभा में पेश किया गया। सरकार के अनुसार, यह कानून उन बढ़ती घटनाओं के मद्देनज़र लाया गया है, जिनमें पवित्र ग्रंथों की बेअदबी से राज्य की सांप्रदायिक शांति भंग होती रही है।
क्यों ज़रूरी था यह कानून?
पिछले कई वर्षों से पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी को लेकर सामाजिक और धार्मिक संगठनों के बीच असंतोष बढ़ता गया था। इस मुद्दे को लेकर कई बार प्रदर्शन भी हुए और सरकार से सख्त कानून की मांग की जाती रही। अब सरकार ने लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस दिशा में ठोस कार्रवाई की है।
कानून की विशेषताएँ:
श्री गुरु ग्रंथ साहिब, भगवद् गीता, पवित्र बाइबिल, कुरान शरीफ और अन्य धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के दोषियों को उम्रकैद की सजा हो सकेगी।
ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा।
दोषियों को पैरोल का अधिकार नहीं मिलेगा।
इस कानून के तहत बेअदबी के मामलों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
-विपक्ष की प्रतिक्रिया
हालाँकि विपक्ष ने विधेयक पर गहराई से चर्चा की मांग की है, लेकिन फिलहाल इस विधेयक को लेकर सदन में कोई तीखा विरोध नहीं देखा गया। बुधवार को इस पर विस्तृत चर्चा के बाद विधेयक को पास किए जाने की संभावना है।
इस विधेयक के ज़रिये पंजाब सरकार न सिर्फ धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा की दिशा में सख्त रुख अपना रही है, बल्कि राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव को कायम रखने के लिए एक सशक्त कानूनी उपाय भी प्रस्तुत कर रही है।
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