Last Updated: September 28, 2026

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सरदार तेजा सिंह समुंदरी की विरासत युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत: तरनजीत सिंह संधू

August 11, 2026

सरदार तेजा सिंह समुंदरी की विरासत युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत: तरनजीत सिंह संधू

अमृतसर: दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि सरदार तेजा सिंह समुंदरी की समानता, शिक्षा, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की सोच आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और युवा पीढ़ी को उनके जीवन एवं योगदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन एवं योगदान को समर्पित आयोजित नाटक के दौरान संबोधित करते हुए संधू ने कहा कि अपने इतिहास को जानना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसमें ऐसे मूल्य एवं विचार मौजूद हैं, जो आज के समाज के लिए भी मार्गदर्शक हैं।

समारोह के आरंभ में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने मुख्य अतिथि सरदार तरनजीत सिंह संधू तथा सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन एवं योगदान को याद करते हुए ऐसे ऐतिहासिक विषयों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।

इस अवसर पर डीन अकादमिक मामले डॉ. एच. एस. सैनी, रजिस्ट्रार के. एस. चहल, अमनदीप अस्पताल से डॉ. अवतार सिंह तथा प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं नाटककार केवल धालीवाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन तथा उस दौर की ऐतिहासिक घटनाओं से संबंधित दुर्लभ एवं यादगार तस्वीरों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में उनके जीवन से जुड़ी अनेक ऐतिहासिक तस्वीरों और महत्वपूर्ण घटनाओं की झलकियां प्रदर्शित की गईं, जिन्होंने समारोह में पहुंचे अतिथियों, विद्यार्थियों एवं दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन किया गया, जिसका निर्देशन प्रसिद्ध रंगकर्मी केवल धालीवाल ने किया। नाटक के माध्यम से सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन, उनकी विचारधारा, संघर्ष तथा समाज के प्रति उनके योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

नाटक की प्रस्तुति की सराहना करते हुए संधू ने निर्देशक केवल धालीवाल तथा पूरी नाट्य टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि रंगमंच इतिहास को केवल पढ़ने के बजाय उसे महसूस करने और नई पीढ़ी तक प्रभावशाली ढंग से पहुंचाने का एक शक्तिशाली माध्यम है। वर्ष 1920 से 1926 तक का समय पंजाब और सिख नेतृत्व के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इस दौरान पंजाब ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अहिंसक संघर्ष, समानता और सामाजिक सुधार के मूल्यों को मजबूत किया।

उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के साथ पंजाब के इतिहास और महान व्यक्तित्वों के योगदान के बारे में अवश्य चर्चा करें। उन्होंने कहा कि उस समय भी शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण माध्यम थी और आज भी शिक्षा ही युवाओं के सशक्तिकरण का सबसे बड़ा स्रोत है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने जीवन को “इम्पैक्टफुल लाइफ” बनाने और समाज के लिए कुछ न कुछ सार्थक योगदान देने का आह्वान किया। “पावर ऑफ वन” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता है। संधू ने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को नई तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने सफल व्यक्तियों, शिक्षकों और अनुभवी लोगों से अपील की कि वे अपना ज्ञान एवं अनुभव युवा पीढ़ी के साथ साझा करें।

समारोह के अंत में मुख्य अतिथि सरदार तरनजीत सिंह संधू के अलावा नाटक में विभिन्न भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों को भी सम्मानित किया गया। नाटक के निर्देशक केवल धालीवाल को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

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