अमृतसर/अजनाला: विधायक तथा आम आदमी पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि आजादी के इतने लंबे समय बाद भी पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा विधानसभा क्षेत्र अजनाला के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक नगर रामदास के बहुआयामी विकास की लगातार उपेक्षा की गई है। यह नगर प्रथम सिख गुरु श्री गुरु नानक देव जी, चौथे गुरु श्री गुरु रामदास जी, छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी तथा सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब, अमृतसर के प्रथम मुख्य ग्रंथी ब्रह्म ज्ञानी बाबा बुड्ढा साहिब जी के चरण स्पर्श से पवित्र हुआ है।
उन्होंने इस उपेक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आज पंजाब विधानसभा के सत्र में ऐतिहासिक नगर रामदास के व्यापक विकास एवं सौंदर्यीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से विशेष आग्रह किया कि श्री गुरु नानक देव जी के अंतिम निवास स्थान गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब (पाकिस्तान) से डेरा बाबा नानक के रास्ते स्थित ऐतिहासिक नगर रामदास के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसके योजनाबद्ध व्यापक सौंदर्यीकरण के लिए विशेष खुला अनुदान (ग्रांट) जारी किया जाए।
विधायक एवं प्रदेश मुख्य प्रवक्ता धालीवाल ने विधानसभा सत्र में उपस्थित शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, राजस्व मंत्री तथा स्थानीय निकाय मंत्री को संबोधित करते हुए यह भी मांग की कि ऐतिहासिक नगर रामदास के बस अड्डे से गुरुद्वारा श्री तप स्थान साहिब (जहाँ ब्रह्म ज्ञानी बाबा बुड्ढा साहिब जी ने लंबे समय तक तपस्या की थी) तक जाने वाली सड़क को विरासत (हेरिटेज) सड़क का दर्जा दिया जाए। साथ ही, बस अड्डे तथा सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का नाम बाबा बुड्ढा साहिब जी के नाम पर रखा जाए।
धालीवाल ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित कस्बा रामदास तथा आसपास के सीमावर्ती एवं पिछड़े गांवों के लोगों को राजस्व विभाग से संबंधित समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सब-तहसील रामदास का दर्जा बढ़ाकर तहसील बनाने की मांग भी की।
उन्होंने कहा कि उनकी ओर से पहले उठाई गई मांग के आधार पर रामदास में ग्राम पंचायतों की सुविधा के लिए बीडीपीओ कार्यालय (ब्लॉक विकास एवं पंचायत विभाग कार्यालय) स्थापित करने की स्वीकृति देने पर वे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के आभारी हैं। उन्होंने जानकारी दी कि ब्रह्म ज्ञानी बाबा बुड्ढा साहिब जी ने नगर रामदास में लंबे समय तक तपस्या की थी। उन्होंने अपने अंतिम सांस भी यहीं ली और उनका अंतिम संस्कार भी रामदास में ही किया गया, जहाँ आज गुरुद्वारा समाधि बाबा बुड्ढा साहिब जी स्थित है।
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