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सूतजी कहते हैं- कार्तिक के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को आंवले का पूजन करें। आंवले का महान वृक्ष सब पापों का नाश करने वाला है। उक्त चतुर्दशी का नाम बैकुण्ठ चतुर्दशी है। उस दिन आंवले की छाया में जाकर मनुष्य राधा सहित देवेश्वर श्रीहरि का पूजन करें। तदनन्तर आंवले की एक सौ आठ प्रदक्षिणा करें। फिर.