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जीवन के एक पड़ाव के बाद लोग खुद को संवारने में ज्यादा रु चि नहीं रखते हैं। उन्हें लगता है कि अब किस के लिए खुद को संवारें। मनोविज्ञानी डाक्टर मधु पाठक कहती हैं, ‘‘खुद के लिए खुद को संवारें। यह आने वाले जीवन में खुशियां भर देता है। अगर हम खुद का ख्याल रखना.