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श्री गुरु नानक देव जी ने अपने दस स्वरूपों में मानवता की निष्काम सेवा की। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी बलिदान की आवश्यकता पड़ी तो जीवन का बलिदान देने में भी गुरु साहिब पीछे नहीं रहे। दशम पिता गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबजादों में भी शहीद होने की समर्था,.