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लखनऊ: प्राचीन काल से ही भारत की परंपरा में खेल और खेलकूद की गतिविधियों को महत्व दिया गया है। भारतीय ऋषि इस बात का उद्घोष करता है कि ‘शरीरमाद्यम् खलु धर्म साधनम्’ यानी धर्म के जितने भी साधन हैं, वह स्वस्थ शरीर से ही संभव हैं। स्वस्थ शरीर के लिए खेलकूद, योगासन, प्राणायाम आदि क्रियाएं.