Last Updated: November 8, 2026

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अब तक पराली जलाने के 188 मामले आए सामने, पिछले साल की तुलना में बड़ी गिरावट

October 5, 2024

अब तक पराली जलाने के 188 मामले आए सामने, पिछले साल की तुलना में बड़ी गिरावट

चंडीगढ़: पंजाब सरकार के लिए किसानों द्वारा पराली जलाना एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि इसे प्रदूषण और पर्यावरण क्षरण का मुख्य कारण माना जाता है। पराली जलाने की घटनाएं पर्यावरण क्षरण का कारण बन रही हैं, वहीं किसान इसे मजबूरी बताते हैं। जिन किसानों को खेत साफ करने के लिए कोई फंड या मदद नहीं मिलती, वे पराली जलाने को मजबूर हैं।

पंजाब सरकार पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। पंजाब सरकार ने किसानों को पराली न जलाने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। साथ ही, सरकार गांवों में पराली के निपटान के लिए मशीनरी उपलब्ध करा रही है। अगर पंजाब में पराली जलाने के मामलों की बात करें, तो इस साल अब तक पराली जलाने के कुल 188 मामले सामने आए हैं। यह संख्या आशाजनक लग रही है, क्योंकि पिछले सालों की तुलना में यह काफी कम है।

पिछले साल इसी समय तक 2023 में 656 मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2022 में 415 मामले सामने आए थे। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि सरकार को किसानों से पराली न जलाने का आग्रह करना चाहिए और उन्हें समय पर आवश्यक मशीनरी उपलब्ध करानी चाहिए। शुक्रवार को अमृतसर में 8 नए मामलों की पुष्टि हुई, जबकि पटियाला में पराली जलाने का एक मामला सामने आया है। इसकी तुलना में पिछले साल इसी दिन राज्य में 95 मामले सामने आए थे और 4 अक्टूबर, 2022 को 65 मामले सामने आए थे।

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