
लुधियाना: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त गेहूं वितरित करने वाले एक राशन डिपो में ई-केवाईसी प्रक्रिया में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। मामला लुधियाना के शहजाद गांव स्थित एक राशन डिपो से जुड़ा है, जहां डिपो संचालक तीर्थ सिंह पर फर्जी तरीके से ई-केवाईसी डेटा तैयार करने का आरोप लगा है।
-जरूरतमंदों का हक मारा गया
सूत्रों के अनुसार, तीर्थ सिंह ने लाभार्थियों के आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट का बार-बार उपयोग कर ई-केवाईसी का डेटा 100% पूर्ण दिखाने का प्रयास किया, ताकि डिपो की रिपोर्टिंग में गड़बड़ी न पकड़ी जा सके। यह सब एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया, जिससे न केवल सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग हुआ, बल्कि जरूरतमंदों का हक भी मारा गया।
-खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने शुरू की जाँच
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (वेस्ट सर्कल) के कंट्रोलर सरताज सिंह चीमा ने बताया कि विभाग को जब ई-केवाईसी और आधार डेटा में भारी अंतर दिखाई दिया, तब मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की गई। विभागीय निरीक्षक द्वारा किए गए सत्यापन में यह बात सामने आई कि डिपो के रिकॉर्ड और विभाग के आधिकारिक डेटा में मेल नहीं है।
-लाभार्थियों की बार-बार हुई e-KYC
जांच में सामने आया कि कुछ लाभार्थियों की ई-केवाईसी बार-बार एक ही आधार और फिंगरप्रिंट से की गई थी। यह दर्शाता है कि लाभार्थियों की पहचान में जानबूझकर हेराफेरी की गई, जिससे योजना का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाया।
अब विभाग ने डिपो संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज करवाने की सिफारिश की है। इस मामले ने सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
-प्रशासन सख्त, हो सकती है बड़ी कार्रवाई
विभागीय सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अन्य डिपो की भी जांच शुरू कर दी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह की धोखाधड़ी दोबारा न हो।
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