Last Updated: October 2, 2026

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विश्व उच्च रक्तचाप दिवस : लापरवाही ही बढ़ा रही समस्या

May 15, 2026

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस : लापरवाही ही बढ़ा रही समस्या

सत्य समझिए, भ्रामकता में अनमोल सांसे ना गवाएं। जी हां, फिलहाल हम सभी लोग जीवन के लिए सबसे आवश्यक घटकों को बर्बाद करने को अपनी झूठी महानता समझ रहे है, लेकिन आज हमसे बड़ा बेवकूफ अन्य कोई नहीं। प्राणी,पशु-पक्षी भी इस मामले में हमसे ज्यादा अक्लमंद हैं।

जायका बदल रहा हमारा जीवन

हम बात कर रहे है यहाँ स्वास्थ्य की, जिसको बिगाड़ने का काम प्रदूषण, हमारी चटोरी जबान, लापरवाही और मिलावटखोरी कर रही हैं। हम अक्सर अपने आसपास रोजाना नए-नए मोर्चे, आंदोलन, रैली, झगड़े, वादविवाद की खबरें देखते-सुनते है, लेकिन जीने के लिए सबसे आवश्यक शुद्ध ऑक्सीजन, स्वच्छ जल और पर्याप्त पोषक आहार हर एक नागरिक को प्राप्त हों, जो हर एक का अधिकार है, जिसका संविधान के मूल अधिकारों में भी उल्लेख है, क्या उसके लिए ऐसे जागरूकता मोहिम हमारे आसपास अक्सर देखने मिलती हैं।

दूषित हवा को मान रहे प्राण वायु

दूषित हवा को हम शरीर में प्राणवायु के रूप में ले रहे है और खुद ही मौत को बुला रहे हैं। धीमे जहर के रूप में विषाक्त भोजन चटकारे लेकर खा रहे हैं। हर वस्तु की बनावट वस्तु आज मार्केट में उपलब्ध है, यह तक कि खाद्यपदार्थों से लेकर, कपडे, यांत्रिक संसाधन, सभी प्रकार के उत्पाद तक डुप्लीकेट मिलते हैं। स्वार्थ ने हमें इतना अँधा बना दिया है कि अपने फायदे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ करना आम बात बन गयी हैं। जो सेहत खराब करे, ऐसी लाइफस्टाइल किस काम की? जिंदगी ज्यादा जरुरी है या स्वार्थ? दुनियाभर की दौलत खर्च करके भी एक सेकंड की जिंदगी नहीं खरीद सकते, फिर सेहत के प्रति लोगों में गंभीरता क्यों नजर नहीं आती? कोई हमारे सेहत से खिलवाड़ कर रहा है तो हम उसे रोकते क्यों नहीं?

हर साल बढ़ रहीं हमारी बीमारियां

तेजी से रफ्तार पकड़ने वाला क्षेत्र वैद्यकीय है, क्योंकि हमारे देश में बीमारियों की वृद्धि साल-दर-साल अत्यधिक हो रही है और जिस प्रकार के प्रदूषित एवं तनावपूर्ण वातावरण में हम आज जी रहे है भविष्य में यह बीमारियां अधिक भयावह रूप धारण करेंगी। अन्य जगह की तरह, हॉस्पिटल में कोई मोलभाव नहीं होता, चिकित्सक द्वारा जो परीक्षण या दवाएं बताई है, वो आवश्यक हो जाती हैं। बीमारियों को बढ़ाने में अधिकतर हम खुद जिम्मेदार है, आज सबसे ज्यादा मौतें हृदय की समस्याओं के कारण हो रही है क्योंकि स्वस्थ हृदय का ख्याल हम ठीक ढंग से नहीं रख पा रहे हैं। हृदय रोगों के लिए उच्च रक्तचाप की समस्या अहम है और उच्च रक्तचाप की समस्या निर्माण में हमारी खराब आदतें जिम्मेदार हैं।

स्वास्थ्य पर भारी हाईपरटेंशन दुनिया

हाइपरटेंशन दुनिया भर में सबसे आम स्वास्थ्य समस्या है, लाखों लोगों को प्रभावित करने के बावजूद, इस स्वास्थ्य समस्या पर अक्सर ध्यान नहीं जाता; यह अक्सर बिना किसी साफ़ लक्षण के बढ़ती रहती है, इसी कारण से, डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे “साइलेंट किलर” कहते हैं। अगर समय रहते इसका योग्य निदान न किया जाए, तो हाई ब्लड प्रेशर शरीर के महत्वपूर्ण अवयवों को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकता है और दिल की बीमारी, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और दूसरी जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा सकता हैं। ज़्यादातर मामलों में, लोग बिना किसी चेतावनी के संकेतों पर ध्यान दिए अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी जीते रहते हैं। हालाँकि, जब रक्तचाप बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, तो तेज़ सिरदर्द, चक्कर आना, सीने में दर्द, धुंधला दिखना, साँस लेने में दिक्कत या दिल की धड़कन का अनियमित होना जैसे लक्षण हो सकते हैं। बदकिस्मती से, बहुत से लोगों को अपनी गंभीर हालत के बारे में तब पता चलता है जब कोई गंभीर चिकित्सा आपातकाल, जैसे स्ट्रोक या ह्यदयाघात होता हैं।

बीपी के आंकड़ों का फायदा नुकसान

रक्तचाप वह है जो हृदय के खून पंप करते समय खून की नसों की दीवारों पर पड़ता है। इसे दो संख्याओं से मापा जाता है। पहला, जिसे ‘सिस्टोलिक प्रेशर’ कहते हैं, दिल के सिकुड़ने पर पड़ने वाले प्रेशर को दिखाता है; दूसरा नंबर, जिसे ‘डायस्टोलिक प्रेशर’ कहते हैं, धड़कनों के बीच दिल के आराम करने पर पड़ने वाले प्रेशर को मापता है। सामान्य रक्तचाप आमतौर पर सिस्टोलिक/ डायस्टोलिक 120/80 से कम होता है। जब किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 या उससे ज़्यादा हो जाता है, तो उस व्यक्ति को उच्च रक्तचाप या ‘हाइपरटेंशन’ माना जाता है। उच्च रक्तचाप को आम तौर पर दो वर्गों में बांटा जाता है, प्राथमिक एवं द्वित्तीय। प्राथमिक हाइपरटेंशन सबसे आम प्रकार है, यह बढ़ती उम्र, खराब डाइट, मोटापा, तनाव, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारणों से समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ता हैं।

अन्य कारण भी हैं बीमारी के

दूसरी ओर, द्वित्तीय हाइपरटेंशन शरीर में दूसरी अंदरूनी चिकित्सा हालत, जैसे किडनी की बीमारी या हार्मोनल डिसऑर्डर की वजह से होता हैं। कुछ दवाएं लेने से भी हाई ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ सकता हैं। अनुवांशिक एवं पारिवारिक हिस्ट्री से भी उच्च रक्तचाप होने का खतरा बढ़ जाता हैं। आज दुनिया भर में हाइपरटेंशन के मरीज़ों की बढ़ती संख्या में आधुनिक जीवनशैली की बड़ी भूमिका हैं। व्यस्त लाइफस्टाइल, ज़्यादा नमक वाला प्रोसेस्ड खाना, पैक्ड फूड, वसायुक्त खाद्य पदार्थ, शक्कर तेल मसाले से तरबतर भारी खाना, देर रात तक जागना, पूरी नींद न लेना, आलस, तंबाकू का इस्तेमाल और बहुत ज़्यादा शराब पीना, ये सभी वजहें उच्च रक्तचाप की वजह बनती हैं। इसके अलावा हमारे देश में प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन 100 में से केवल 3 -4 लोग ही जागरूकता दिखाते है, बाकियो को तो कुछ फर्क ही नहीं पड़ता ऐसा महसूस होता हैं।

1.4 बिलियन वयस्क हैं परेशान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि, दुनिया भर में 1.4 बिलियन से ज़्यादा वयस्क अभी हाइपरटेंशन से परेशान हैं, परंतु दुःख की बात है कि इनमें से कई मामलों का पता नहीं चल पाता या उन्हें ठीक से मैनेज नहीं किया जाता। अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर के लंबे समय तक चलने वाले असर गंभीर हो सकते हैं। हार्ट फेलियर, सीने में दर्द या हार्ट अटैक हो सकता है, स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता हैं। किडनी खास तौर पर कमज़ोर होती है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर शरीर से अवशेष को असरदार तरीके से फिल्टर करने की उनकी क्षमता को कम करता है, नज़र कमज़ोर होकर सोचने-समझने की क्षमता में कमी भी होती हैं।

रोका जा सकता है उच्च रक्तचाप

उच्च रक्तचाप एक ऐसी बीमारी है जिसे रोका एवं नियंत्रित किया जा सकता है, इसके लिए सबसे पहले अपने दिनचर्या में बदलाव सबसे असरदार कदम हैं। एक हेल्दी डाइट जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले दुग्ध उत्पाद शामिल हों, जो हृदय की सेहत को काफी बेहतर बना सकती हैं। नमक कम खाना, सामान्य वज़न बनाए रखना, नियमित व्यायाम करना और सभी प्रकार के नशे से दूरी बनाना हाई ब्लड प्रेशर होने के खतरे को कम कर सकता है।

तनावमुक्त आराम ही पहला उपाय

तनावमुक्त आराम, पूरी नींद और हंसीखुशी भरे वातावरण से तनाव को नियंत्रित करने से ब्लड प्रेशर लेवल बेहतर बना रहता हैं। समस्या गंभीर होने पर, सिर्फ़ जीवनशैली में बदलाव पर्याप्त नहीं होते, चिकित्सक ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद के लिए आवश्यक दवाएँ भी देते हैं। नियमित रक्तचाप की जाँच ज़रूरी है, क्योंकि जल्दी पता चलने से जान बच सकती हैं। ब्लड प्रेशर को समझना और नियंत्रित करना एक हेल्दी भविष्य की ओर सबसे ज़रूरी कदम हैं। स्वस्थ रहने के लिए हरियाली भरा शुद्ध वातावरण बहुत जरूरी हैं। हमेशा जागरूकता, हेल्दी आदतें अपनाकर और समय पर इलाज करवाकर, हाइपरटेंशन जैसे अन्य भी अनेक बीमारियों को बखूबी नियंत्रित कर अपनी स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।
-डॉ. प्रितम भि. गेडाम

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