
यमुनानगर। हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमाओं से सटा कलेसर नेशनल पार्क इन दिनों हाथियों की शरण स्थली बना हुआ है। हाथियों के झुंड कीचड़ और तालाबों में अठखेलियां कर रहे हैं। ये क्रियाएं इनको गर्मी से सुकून देने का काम कर रही हैं।
करीब 25 हजार एकड़ में फैला ये घना जंगल और हरियाली से भरपूर है और ये क्षेत्र हाथियों, तेंदुओं और हिरणों का शरण स्थली माना जाता है। यहां शाकाहारी जीवों के लिए हरी घास और वनस्पति उपलब्ध है। जबकि मांसाहारी जीवों को भी आसानी से शिकार मिल जाता है। जंगल में देवदार, शीशम, खैर, नीम, पीपल, बरगद और सागवान जैसे बड़े छायादार पेड़ हैं। लाल तालाब, बरसाती नदियां और प्राकृतिक पोखर गर्मी में वन्य जीवों के लिए सहारा बने हैं। जानवर दिनभर यहां पानी पीने और शरीर को ठंडा रखने के लिए पहुंचते हैं। गर्मी के दिनों में हाथियों की गतिविधियां सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही हैं।
यहां हाथी पानी में लंबे समय तक रहने के साथ अपने शरीर पर कीचड़ भी लगाते हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कीचड़ हाथियों को गर्मी और कीड़ों से बचाने में मदद करती है। कलेसर के पास स्थित हाथी पुनर्वास केंद्र में भी इन दिनों विशेष प्रबंध किए हैं। यहां लक्ष्मी वन, लक्ष्मी टू और चंचल नामक मादा हाथी दिनभर तालाबों में समय बिताकर गर्मी से राहत पा रही हैं। हाथियों को गन्ना, तरबूज, केला, ज्वार और शक्कर का शर्बत दिया जा रहा है, जिससे कि उनके शरीर में पानी और ऊर्जा की कमी न हो।
कर्मचारी उनके स्वास्थ्य पर नजर रखते हैं। जंगल क्षेत्र में करीब 50 तेंदुओं की मौजूदगी भी है। कई बार तेंदुए जंगल से सटे खेतों और आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ानी पड़ती है। गर्मी बढ़ने पर विशालकाय अजगर भी यमुना नदी के किनारे मैदानी क्षेत्रों तक दिखाई देने लगते हैं। कलेसर पक्षियों और छोटे जीव-जंतुओं का भी बड़ा आवास है। यहां मोर, तीतर, जंगली मुर्गा, तोता, मैना और सारस जैसे पक्षी बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं। जंगल के बाहरी हिस्सों में बंदर और भीतर के क्षेत्रों में लंगूरों के समूह देखे जा सकते हैं।
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