बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान का असर अब युवाओं की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। मधुमेह, थायराइड और हृदय रोग जैसी बीमारियां कम उम्र में ही सामने आ रही हैं। लगातार तनाव, काम का दबाव और नींद की कमी दिल और दिमाग दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। हर साल हृदय रोग से होने वाली मौतों के आंकड़े बढ़ रहे हैं, जिनमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं।
हालांकि सरकार जागरूकता अभियान चलाती रहती है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार कई बीमारियों से बचाव का उपाय हमारी रसोई में ही मौजूद है। आयुर्वेद में हृदय रोगों का एक बड़ा कारण तनाव और शरीर में बढ़ते ‘आम’ यानी विषैले तत्वों को माना गया है। पैक्ड फूड, ज्यादा मीठा, अनियमित दिनचर्या और कम नींद जैसी आदतें दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दालें और फलियां दिल को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। भारतीय थाली का अहम हिस्सा रही दालें नियमित रूप से खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ये कोरोनरी आर्टरी डिजीज के खतरे को कम करने में मददगार मानी जाती हैं। इनमें घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाने में सहायक होता है।
शरीर में कोलेस्ट्रॉल स्वाभाविक रूप से मौजूद रहता है, लेकिन जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है तो रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ने लगता है। इससे दिल को रक्त पंप करने में दिक्कत होती है और सांस फूलना, घबराहट या धड़कन अनियमित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
दालों और फलियों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे ये ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी मदद कर सकती हैं। हृदय रोग से बचाव के लिए लोबिया, मसूर, राजमा, मूंग, चना और मोठ जैसी दालों को आहार में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।
इसके साथ ही सलाद, सूप, हरी और रेशेदार सब्जियां तथा ब्राउन राइस को भी रोजमर्रा के भोजन में जगह देने की सलाह दी जाती है। ब्राउन राइस में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार के साथ तनाव कम करना, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी दिल को स्वस्थ रखने के लिए उतने ही जरूरी हैं।

