Site icon Dainik Savera Times

नाड़ी शोधन: दिल-दिमाग की सेहत के लिए वरदान, सही विधि व सावधानियां

Health: Nadi Sodhan: Blessings, Correct Method and Precautions for Heart-Mind Health

Health: Nadi Sodhan: Blessings, Correct Method and Precautions for Heart-Mind Health Health: Nadi Sodhan: Blessings, Correct Method and Precautions for Heart-Mind Health

लाइफ्स्टाइल डेस्क: योग और प्राणायाम शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में ‘नाड़ीशोधन प्राणायाम’ एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपाय के रूप में सामने आता है। यह प्राणायाम न केवल सांस को संतुलित करता है, बल्कि मन-मस्तिष्क पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है।

ये भी पढ़ें: AAP सरपंच हत्याकांड के दो शूटर गिरफ्तार, DGP गौरव यादव ने किया खुलासा

दिलचस्प बात है कि यह प्राणायाम हर उम्र के लोग कर सकते हैं। हालांकि, गंभीर स्वास्थ्य समस्या वाले इस योगासन को करने से पहले जरूर एक बार एक्सपर्ट से सलाह लें। आयुष मंत्रालय ने इस योगासन को लेकर अपनी राय भी दी है।

उनके अनुसार, ‘नाड़ी शोधन प्राणायाम’ एक महत्वपूर्ण अभ्यास है, जो तनाव और चिंता कम करता है, मानसिक शांति देता है, एकाग्रता बढ़ाता, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता, फेफड़ों को स्वस्थ बनाता, रक्त संचार सुधारता और पाचन क्रिया को ठीक करता, जिससे मन शांत और शरीर स्वस्थ रहता है।

इसे करने के लिए एक नासिका से सांस लेकर दूसरी से छोड़ते हैं, और धीरे-धीरे समय बढ़ाते हैं। इसका अभ्यास करने के लिए योग मेट पर रीढ़ सीधी करके बैठ जाएं। अब दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करें और बायीं नासिका से धीरे-धीरे गहरी सांस लें।

फिर दाहिने हाथ की अनामिका व कनिष्ठा उंगली से बायीं नासिका बंद कर दाहिनी नासिका से सांस छोड़ें। फिर दाहिनी नासिका से ही सांस लें और बायीं से छोड़ें। इस क्रम को दोहराएं। एक चक्र पूरा होने पर दोनों नासिकाओं से सामान्य श्वास लें।

ये भी पढ़ें: ईरान ने ट्रंप को दे डाली खुली धमकी, कहा- अमेरिका और इजराइल पर कर देंगे हमला

शुरुआत में इसका अभ्यास 5 से 10 मिनट और धीरे-धीरे करना चाहिए। खाली पेट सुबह के समय इसका अभ्यास सबसे उत्तम माना जाता है। हालांकि, कुछ सावधानी बरतनी भी जरूरी है। इस प्राणायाम को कभी जबरदस्ती न करें।

सांस लेना-छोड़ना पूरी तरह सहज और स्वाभाविक होना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, या गंभीर नाक की समस्या वाले व्यक्तियों को योग प्रशिक्षक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

Exit mobile version