
नई दिल्ली: कांग्रेस के नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार की आर्थिक सोच पर सवाल उठाते सोमवार को 2025-26 के बजट में पूंजीगत और सामाजिक क्षेत्र के बजट में कटौती कर के राजकोषीय घाटे को सीमित करने का प्रयास तो किया गया है पर इस बजट से अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि बजट में व्यक्तिगत आय कर में एक लाख करोड़ रुपए की छूट भारत के 324 लाख करोड़ रुपए के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी ) के मात्र 0.3 प्रतिशत के बराबर है।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या इतनी भर छूट से अर्थव्यवसथा को बल मिलेगा? उन्होंने कहा कि आर्थिक दर्शन के बिना आर्थिक नीति नहीं बनती।’ चिदंबरम ने कहा कि देश में केवल 3.2 करोड़ लोक आयकर देते हैं बाकी केवल कर विवरण भरते हैं और उनका कर का भुगतान शून्य रहता है। सरकार ने कर छूट वाली अधिकतम आयु सीमा को 7 से बढ़ा कर 12 प्रतिशत किया है और यह छूट धनाढ्यों को भी फायदा कर रहा है। इस छूट से 80-85 लाख करदाता कर के जाल से बाहर हो जाएंगे और 2.5 करोड़ करदाताओं को कर का फायदा होगा।
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