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Haryana News : ड्यूटी पर जान देने वाले के परिवार को मिलेंगे 30 लाख

Haryana government announcement

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चंडीगढ़। Haryana government announcement प्रदेश की नायब सैनी सरकार ने फैसला लिया है कि जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा करने हुए जान देने वाले कर्मचारियों के परिजनों को 30 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। सरकार ने ग्रुप C और D श्रेणी के कर्मचारियों के आश्रितों के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता राशि में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।

कर्मचारियों को मिला सम्मानजनक सुरक्षा कवच

सरकार का यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो हर दिन खतरों से खेलते हैं। चाहे वह अवैध खनन रोकने वाले माइनिंग गार्ड हों, जंगलों की रक्षा करने वाले वन कर्मी या फिर आग की लपटों के बीच कूदने वाले फायर फाइटर्स। अक्सर इन विभागों में ग्रुप C और D श्रेणी के कर्मचारी ही फ्रंटलाइन पर तैनात होते हैं।

दो अलग-अलग कोषों से मिलेगी मदद

प्रवक्ता ने बताया कि इस सहायता राशि का ढांचा दो हिस्सों में तैयार किया है। पहले चरण में ‘मुख्यमंत्री हरियाणा कर्मचारी दुर्घटना सुरक्षा योजना’ के तहत 10 लाख रुपये का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ से 20 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ने का फैसला किया है। इस तरह, अब मृतक कर्मचारी का परिवार कुल 30 लाख रुपये की आर्थिक मदद का हकदार होगा।

अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

अक्सर देखा जाता है कि सरकारी सहायता मिलने में कागजी कार्यवाही की वजह से महीनों लग जाते हैं। लेकिन इस मामले में नायब सैनी सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग ने इस संबंध में लिखित आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को साफ कहा गया है कि कानूनी औपचारिकताएं (Paperwork) महज एक प्रक्रिया होनी चाहिए, न कि भुगतान में रुकावट। संबंधित विभाग के मुखियाओं को निर्देश हैं कि मृतक कर्मचारी के आश्रितों के बैंक खाते में यह राशि ‘प्रायोरिटी’ के आधार पर जमा होनी चाहिए।

बढ़ेगा कर्मचारियों का मनोबल

राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा। जब एक कर्मचारी को पता होता है कि उसके पीछे सरकार उसके परिवार की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठा रही है, तो वह अपनी जिम्मेदारी को और अधिक निडरता से निभा पाता है। विपक्ष और कर्मचारी यूनियनों ने भी दबी जुबान में सरकार के इस कदम की सराहना की है, क्योंकि लंबे समय से इस सहायता राशि को बढ़ाए जाने की मांग की जा रही थी।

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