करनाल जिला उपभोक्ता आयोग ने ऑनलाइन मेवा सप्लाई करने वाले तीन विक्रेताओं को बड़ी सजा सुनाई। आयोग ने उन्हें दो लाख 13 हजार 396 रुपये शिकायतकर्ता को देने का आदेश दिया। मामला खराब काजू की ऑनलाइन डिलिवरी से जुड़ा था।
सीएचडी निवासी पीयूष बंसल ने Flipkart के माध्यम से काजू खरीदे थे। पैकेट खोलते ही उन्हें अंदर जिंदा कीड़े मिले। यह तस्वीरें और वीडियो आयोग में प्रमाण के रूप में पेश किए गए।
पीयूष बंसल ने एक किलो काजू मंगाए थे। लेकिन पैकिंग का कुल वजन एक किलो था। खाली डिब्बा 110 ग्राम निकला। इससे नेट वेट कम साबित हुआ। आयोग ने इसे Online Shopping Fraud की श्रेणी में गंभीर माना।
शिकायतकर्ता ने बताया कि दिखाया गया ग्रेड और मिला उत्पाद बिल्कुल अलग था। लगातार कस्टमर केयर से संपर्क के बावजूद समाधान नहीं मिला। इससे मानसिक तनाव बढ़ा। उन्होंने लागत, मुआवजा और केस खर्च की मांग की।
फ्लिपकार्ट की ओर से कहा गया कि वे केवल Online Marketplace Platform हैं। उत्पादों का नियंत्रण सप्लायर के पास होता है। इसलिए सीधी जिम्मेदारी सेवा प्रदाताओं पर बनती है।
सुनवाई के दौरान तीनों विक्रेता उपस्थित नहीं हुए। आयोग ने उन्हें एकतरफा कर दिया। सभी सबूतों पर विचार करते हुए आयोग ने उत्पाद को दोषपूर्ण माना। शिकायतकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया गया।
अंत में आयोग ने गांधी ओवरसीज, न्यूट्रीचेफ और केशरिया कंवर जी ट्रेडिंग कंपनी को दोषी ठहराया। उन्हें 45 दिनों में 2,396 रुपये लागत, दो लाख रुपये मानसिक क्षति मुआवजा और 11 हजार रुपये केस खर्च देने होंगे।
यह निर्णय Consumer Court Karnal का एक महत्वपूर्ण आदेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला Online Shopping में Defective Products के खिलाफ उपभोक्ताओं को मजबूत आधार देता है।