
Kullu Dussehra : Questions Raised Over Deity Records : कुल्लू। कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं के पंजीकरण, निमंत्रण और सुविधाओं को लेकर विवाद गहरा गया है। देव संस्कृति शोध संस्थान के मुख्य ट्रस्टी ओमप्रकाश शर्मा ने जिला प्रशासन और जिला कुल्लू कारदार संघ से स्पष्ट करने की मांग की है कि जिले में कुल कितने देवी-देवता पंजीकृत हैं और दशहरा उत्सव में किन्हें आमंत्रित कर सुविधाएं दी जाती हैं।
उन्होंने बाज उल अर्ज में 289 देवी-देवताओं के पंजीकरण और कारदार संघ के रिकॉर्ड में 471 देवी-देवताओं का उल्लेख होने पर सवाल उठाए। साथ ही, उन्होंने कारदार संघ पर देव परंपराओं के मामलों में मनमानी करने के आरोप भी लगाए। ऐसे में देवी देवता कारदार संघ और जिला प्रशासन यह बात स्पष्ट करें कि जिला कुल्लू में कुल कितने देवी देवता है और किन-किन देवी देवताओं को दशहरा उत्सव में बुलाया जाता है। ढालपुर में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए देव संस्कृति शोध संस्थान के मुख्य ट्रस्टी ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि बीते दिनों हाईकोर्ट के द्वारा भी बंजार के एक देवता बंशीरा को दशहरा उत्सव में मूलभूत सुविधाएं न उपलब्ध करवाने का फैसला दिया गया है और डीसी कुल्लू के फैसले के अनुसार उसे घरेलू देवता कहा गया है।
ऐसे में जिला कुल्लू में हर साल 300 से अधिक देवी देवता दशहरा उत्सव में शिरकत करते हैं और प्रशासन के द्वारा उन्हें सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती है। जबकि बाज उल अर्ज के अनुसार 289 देवी देवताओं को ही सुविधाएं देने की बात कही गई है। ऐसे में डीसी कुल्लू भी इस बात को स्पष्ट करें कि किन-किन देवी देवताओं को दशहरा उत्सव का निमंत्रण दिया जाता है और किन-किन देवी देवताओं को यहां पर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती है।
उन्होंने कारदार संघ पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि वह इस मामले में जिला प्रशासन को भी गुमराह कर रहे हैं। कारदार संघ के द्वारा जिन देवी देवता को निमंत्रण देने की बात कही जाती है उन्हें ही प्रशासन के द्वारा निमंत्रण और सुविधाएं दिए जा रही है। जबकि अन्य बाकी देवी देवताओं को दरकिनार किया जा रहा है। ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि कारदार संघ देव नीति में राजनीति बिल्कुल भी ना करें और जिस तरह से बुजुर्गों के समय से समृद्ध देव परंपरा का पालन किया जा रहा है।
देव परंपरा का पालन आज भी किया जाना चाहिए। वही ओमप्रकाश शर्मा ने ढालपुर में बीते दिनों पहले कुष्टू काहिका के आयोजन पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि देवी देवता कारदार संघ अपनी मर्जी से इस तरह के आयोजन करवा रहा है। यहां पर कभी मैदान अशुद्ध होने की बात कही जाती है तो कभी किसी बात को लेकर इस तरह की आयोजन किया जा रहे हैं। जबकि ढालपुर मैदान सार्वजनिक मैदान है और यहां पर हर साल कई तरह की गतिविधियों की जाती है। ऐसे में कारदार संघ देव समाज को गुमराह करना भी बंद करें।