Ram Temple will be videographed : अयोध्या। राम मंदिर सहित पूरे परिसर में ट्रस्ट की ओर से रखी गईं दानपेटिकाओं से नकदी निकालने और इसे यात्री सुविधा केंद्र के गणना कक्ष तक ले जाने की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।
सूत्र बताते हैं कि जांच के बीच ही एसआइटी की ओर से इसका निर्देश मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोगों को दिया गया है। पहले नकदी निकालकर ले जाने की वीडियोग्राफी नहीं होती थी, इसलिए यह पता नहीं चल पाता था कि किस दानपात्र से नकदी के अलावा सोना-चांदी के आभूषण या बहुमूल्य वस्तुएं मिली हैं। गणना प्रक्रिया में शामिल कलेक्शन एजेंसी, ट्रस्ट और बैंक कर्मी इसी का लाभ उठाते हुए आभूषण पार कर देते थे। बता दें कि श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में गबन के सुबूत मिले थे। इसमें गणना और बैंककर्मियों के साथ टिन्नू यादव की भूमिका सामने आई है। इन पर जल्द एफआईआर दर्ज हो सकती है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा के अलावा निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
दोनों के खिलाफ कई गवाह सामने आए हैं और ठोस साक्ष्य भी मिले हैं। SIT की जांच में कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिनमें मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी सवालों के घेरे में हैं। अयोध्या से शनिवार को लखनऊ लौटी SIT मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंप सकती है। उसके बाद दोषियों और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सकती है। 13 जून को गठित SIT जांच के लिए 15 जून को अयोध्या पहुंची थी। इसमें शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज आईजी किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने छह दिन में ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों, गणना कर्मियों व पकड़े गए संदिग्धों से लंबी पूछताछ की।
यदि बात करें सूत्रों की तो चढ़ावे की राशि में चोरी की पुष्टि हुई है। इसे संदिग्धों ने स्वीकारा भी है। एसआईटी ने तमाम लोगों के बयान दर्ज किए। टिन्नू से तीन दिन लगातार पूछताछ की गई। टिन्नू ने दान राशि की गणना से लेकर उसे जमा कराने की व्यवस्था में अनिल मिश्रा व गोपाल राव की भूमिका बताई। अन्य गवाहों ने भी इन दोनों के नाम प्रमुखता से लिए। एसआईटी ने करीब 150 लोगों से पूछताछ की। करीब 30 लोगों की भूमिका गबन में संदिग्ध मिली। इसमें ट्रस्ट के 3-4 पदाधिकारियों समेत प्रबंधन के 20-25 लोगों की लापरवाही सामने आई।
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