मार्च का महीना शुरू होने में बहुत कम समय बचा है लेकिन अभी से दोपहर के समय मौसम गर्म होने लगा है। आने वाले महीनों में तापमान और बढ़ेगा ऐसे में शरीर को ठंडा और संतुलित रखना जरूरी हो जाता है। आयुर्वेद में ऐसे मौसम के लिए बेल को बेहद उपयोगी माना गया है। यह.
योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति का भी एक महत्वपूर्ण साधन है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, अष्ट कुंभक एक ऐसा विशिष्ट योग अभ्यास है, जिसमें आठ प्रकार की प्राणायाम तकनीकें शामिल हैं। अष्ट कुंभक का उल्लेख हठ योग प्रदीपिका में मिलता है, जिसके अंतर्गत आठ उन्नत प्राणायाम.
पेट शरीर का अहम और जरूरी हिस्सा होता है। माना जाता है कि अगर पेट सही है तो आधी से ज्यादा बीमारियां अपने आप ठीक हो जाती हैं, लेकिन आज की आरामदायक जीवनशैली की वजह से पेट से जुड़े रोग हर उम्र के लोगों की परेशानी बन चुके हैं। भूख न लगना, गैस बनना, एसिडिटी,.
लोध्र एक बेहद खास वनौषधि है, खासकर महिलाओं के लिए यह बहुत फायदेमंद मानी जाती है। लोध्र की छाल का इस्तेमाल आयुर्वेद में हजारों सालों से होता आ रहा है। इसे पाचन और रक्त शुद्धि के साथ-साथ स्त्री स्वास्थ्य और त्वचा के लिए भी बहुत उपयोगी माना गया है। लोध्र त्वचा की अशुद्धियों को दूर.
लाइफ्स्टाइल डेस्क: सेहतमंद रहने के लिए बड़े-बड़े बदलावों की जरूरत नहीं, बस छोटी सी आदत काफी है। आयुर्वेद भी ऐसे ही एक छोटे लेकिन बेहद फायदेमंद उपाय की सलाह देता है, जिसे उषापान कहते हैं। सुबह उठकर सबसे पहले खाली पेट गुनगुना पानी पीना। यह आसान तरीका पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। भारत सरकार.
माघ मास में ठंड सबसे ज्यादा पड़ती है। लिहाजा, शीतजनित रोगों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में गर्म तासीर वाली तिल का उपयोग धर्म और आयुर्वेद दोनों में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मकर संक्रांति, तिल द्वादशी, गणेश चौथ जैसे त्योहारों में तिल से स्नान, दान, पूजा और भोजन करने का विशेष.
Health Update: कड़वे नीम के मीठे गुण : पत्तों के रस के सेवन के फायदे और सावधानियां नीम का नाम सुनते ही मुंह कड़वा और कसैला हो जाता है। इसके पत्तों को चबाकर निगल पाना हर किसी के लिए बड़ा टास्क है, लेकिन थोड़े पानी और नीम के पत्तों के साथ बना रस शरीर को.
Health Update: मामूली सी दिखने वाली चांगेरी घास है गुणों का खजाना, हृदय रोगों से लेकर ल्यूकोरिया तक में असरदार आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर ऐसे कई अमूल्य खजाने हैं, जिनका उपयोग सदियों से विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। इसमें अनेक जड़ी-बूटियों को संजीवनी के रूप में माना गया है।.
केसर का इस्तेमाल आयुर्वेद में औषधि के तौर पर होता आया है। केसर के इतने गुण होते हैं कि वह शरीर के तीनों दोषों को संतुलित करने की क्षमता रखता है। यह पोषक तत्वों को अच्छे से पचाने और शरीर के उत्तकों से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। इसलिए सदियों से केसर.
ठंड के मौसम में त्वचा शुष्क हो जाती है और रूखापन बढ़ जाता है। ऐसे में आयुर्वेद स्नान से पहले तिल के तेल से हल्की मालिश करने की सलाह देता है। यह न केवल त्वचा को नमी प्रदान करता है, बल्कि ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और तन-मन दोनों को तरोताजा रखता है। आयुर्वेद.