Last Updated: November 6, 2026

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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 08 दिसंबर 2024

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 02 दिसंबर 2024

धर्म : धनासरी महला ४ ॥ मेरे साहा मै हरि दरसन सुखु होए ॥ हमरी बेदनि तू जानता साहा अवरु किआ जानै कोए ॥ रहाउ ॥ साचा साहिबु सचु तू मेरे साहा तेरा कीआ सचु सभु होए ॥ झूठा किस कउ आखीऐ साहा दूजा नाही कोए ॥१॥ सभना विचि तू वरतदा साहा सभि तुझहि धिआवहि.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 01 दिसंबर 2024

धर्म : बैराड़ी महला ४ ॥ हरि जनु राम नाम गुन गावै ॥ जे कोई निंद करे हरि जन की अपुना गुनु न गवावै ॥१॥ रहाउ ॥ जो किछु करे सु आपे सुआमी हरि आपे कार कमावै ॥ हरि आपे ही मति देवै सुआमी हरि आपे बोलि बुलावै ॥१॥ हरि आपे पंच ततु बिसथारा विचि.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 30 नवंबर 2024

धर्म : सोरठि महला ५ ॥ मेरा सतिगुरु रखवाला होआ ॥ धारि क्रिपा प्रभ हाथ दे राखिआ हरि गोविदु नवा निरोआ ॥१॥ रहाउ ॥ तापु गइआ प्रभि आपि मिटाइआ जन की लाज रखाई ॥ साधसंगति ते सभ फल पाए सतिगुर कै बलि जांई ॥१॥ हलतु पलतु प्रभ दोवै सवारे हमरा गुणु अवगुणु न बीचारिआ ॥.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 29 नवंबर 2024

धर्म : धनासरी छंत महला ४ घरु १ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ हरि जीउ क्रिपा करे ता नामु धिआईऐ जीउ ॥ सतिगुरु मिलै सुभाइ सहजि गुण गाईऐ जीउ ॥ गुणy गाइ विगसै सदा अनदिनु जा आपि साचे भावए ॥ अहंकारु हउमै तजै माइआ सहजि नामि समावए ॥ आपि करता करे सोई आपि देइ त पाईऐ.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 27 नवंबर 2024

धर्म : सलोकु मः ४ ॥ अंतरि अगिआनु भई मति मधिम सतिगुर की परतीति नाही ॥ अंदरि कपटु सभु कपटो करि जाणै कपटे खपहि खपाही ॥ सतिगुर का भाणा चिति न आवै आपणै सुआए फिराही ॥ किरपा करे जे आपणी ता नानक सबदि समाही ॥१॥मः ४ ॥ मनमुख माइआ मोहि विआपे दूजै भाए मनूआ थिरु.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 25 नवंबर 2024

धर्म : धनासरी महला १ ॥ जीवा तेरै नाइ मनि आनंदु है जीउ ॥ साचो साचा नाउ गुण गोविंदु है जीउ ॥ गुर गिआनु अपारा सिरजणहारा जिनि सिरजी तिनि गोई ॥ परवाणा आइआ हुकमि पठाइआ फेरि न सकै कोई ॥ आपे करि वेखै सिरि सिरि लेखै आपे सुरति बुझाई ॥ नानक साहिबु अगम अगोचरु जीवा.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 24 नवंबर 2024

धर्म : धनासरी महला 5 ll मेरा लागो राम सिउ हेतु ॥ सतिगुरु मेरा सदा सहाई जिनि दुख का काटिआ केतु ॥१॥ रहाउ ॥ हाथ देइ राखिओ अपुना करि बिरथा सगल मिटाई ॥ निंदक के मुख काले कीने जन का आपि सहाई ॥१॥ साचा साहिबु होआ रखवाला राखि लीए कंठि लाइ ॥ निरभउ भए सदा.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 23 नवंबर 2024

धर्म : सलोकु मः ३ ॥ रे जन उथारै दबिओहु सुतिआ गई विहाइ ॥ सतिगुर का सबदु सुणि न जागिओ अंतरि न उपजिओ चाउ ॥ सरीरु जलउ गुण बाहरा जो गुर कार न कमाइ ॥ जगतु जलंदा डिठु मै हउमै दूजै भाइ ॥ नानक गुर सरणाई उबरे सचु मनि सबदि धिआइ ॥१॥ मः ३ ॥.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 22 नवंबर 2024

धर्म : सलोक ॥ मन इछा दान करणं सरबत्र आसा पूरनह ॥ खंडणं कलि कलेसह प्रभ सिमरि नानक नह दूरणह ॥१॥ हभि रंग माणहि जिसु संगि तै सिउ लाईऐ नेहु ॥ सो सहु बिंद न विसरउ नानक जिनि सुंदरु रचिआ देहु ॥२॥ पउड़ी ॥ जीउ प्रान तनु धनु दीआ दीने रस भोग ॥ ग्रिह मंदर.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 20 नवंबर 2024

धर्म : सोरठि महला ३ ॥ हरि जीउ तुधु नो सदा सालाही पिआरे जिचरु घट अंतरि है सासा ॥ इकु पलु खिनु विसरहि तू सुआमी जाणउ बरस पचासा ॥ हम मूड़ मुगध सदा से भाई गुर कै सबदि प्रगासा ॥१॥ हरि जीउ तुम आपे देहु बुझाई ॥ हरि जीउ तुधु विटहु वारिआ सद ही तेरे नाम.

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