Last Updated: September 20, 2026

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हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 8 जनवरी 2023

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 2 जनवरी 2023

वडहंसु महला ४ ॥ हरि सतिगुर हरि सतिगुर मेलि हरि सतिगुर चरण हम भाइआ राम ॥ तिमर अगिआनु गवाइआ गुर गिआनु अंजनु गुरि पाइआ राम ॥ गुर गिआन अंजनु सतिगुरू पाइआ अगिआन अंधेर बिनासे ॥ सतिगुर सेवि परम पदु पाइआ हरि जपिआ सास गिरासे ॥ जिन कंउ हरि प्रभि किरपा धारी ते सतिगुर सेवा लाइआ.

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 1 जनवरी 2023

सोरठि महला ३॥ बिनु सतिगुर सेवे बहुता दुखु लागा जुग चारे भरमाई ॥ हम दीन तुम जुगु जुगु दाते सबदे देहि बुझाई ॥१॥ हरि जीउ क्रिपा करहु तुम पिआरे ॥ सतिगुरु दाता मेलि मिलावहु हरि नामु देवहु आधारे ॥ रहाउ ॥ मनसा मारि दुबिधा सहजि समाणी पाइआ नामु अपारा ॥ हरि रसु चाखि मनु निरमलु.

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 31 दिसंबर

धनासरी छंत महला ४ घरु १ ੴ सतिगुर प्रसादि॥ हरि जीउ क्रिपा करे ता नामु धिआईऐ जीउ ॥ सतिगुरु मिलै सुभाइ सहजि गुण गाईऐ जीउ॥ गुण गाइ विगसै सदा अनदिनु जा आपि साचे भावए ॥ अहंकारु हउमै तजै माइआ सहजि नामि समावए ॥ आपि करता करे सोई आपि देइ त पाईऐ ॥ हरि जीउ क्रिपा.

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 24 दिसंबर

सूही महला १ घरु ६ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ उजलु कैहा चिलकणा घोटिम कालड़ी मसु ॥ धोतिआ जूठि न उतरै जे सउ धोवा तिसु ॥१॥ सजण सेई नालि मै चलदिआ नालि चलंन्हि ॥ जिथै लेखा मंगीऐ तिथै खड़े दिसंनि ॥१॥ रहाउ ॥ कोठे मंडप माड़ीआ पासहु चितवीआहा ॥ ढठीआ कंमि न आवन्ही विचहु सखणीआहा ॥२॥.

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 23 दिसंबर

सलोक ॥ संत उधरण दइआलं आसरं गोपाल कीरतनह ॥ निरमलं संत संगेण ओट नानक परमेसुरह ॥१॥ चंदन चंदु न सरद रुति मूलि न मिटई घांम ॥ सीतलु थीवै नानका जपंदड़ो हरि नामु ॥२॥ पउड़ी ॥ चरन कमल की ओट उधरे सगल जन ॥ सुणि परतापु गोविंद निरभउ भए मन ॥ तोटि न आवै मूलि संचिआ.

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 22 दिसंबर

सलोकु मः १ ॥ जे करि सूतकु मंनीऐ सभ तै सूतकु होइ॥ गोहे अतै लकड़ी अंदरि कीड़ा होइ ॥ जेते दाणे अंन के जीआ बाझु न कोइ ॥ पहिला पाणी जीउ है जितु हरिआ सभु कोइ ॥ सूतकु किउ करि रखीऐ सूतकु पवै रसोइ॥ नानक सूतकु एव न उतरै गिआनु उतारे धोइ ॥१॥ अगर सूतक.

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 21 दिसंबर

सलोक मः ३॥ माणसु भरिआ आणिआ माणसु भरिआ आइ॥ जितु पीतै मति दूरि होइ बरलु पवै विचि आइ ॥ आपणा पराइआ न पछाणई खसमहु धके खाइ॥ जितु पीतै खसमु विसरै दरगह मिलै सजाइ॥ झूठा मदु मूलि न पीचई जे का पारि वसाइ ॥ नानक नदरी सचु मदु पाईऐ सतिगुरु मिलै जिसु आइ ॥ सदा साहिब.

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 20 दिसंबर

रामकली महला १ ॥ सुरति सबदु साखी मेरी सिंङी बाजै लोकु सुणे ॥ पतु झोली मंगण कै ताई भीखिआ नामु पड़े ॥१॥बाबा गोरखु जागै ॥ गोरखु सो जिनि गोइ उठाली करते बार न लागै ॥१॥ रहाउ॥पाणी प्राण पवणि बंधि राखे चंदु सूरजु मुखि दीए ॥ मरण जीवण कउ धरती दीनी एते गुण विसरे ॥२॥सिध साधिक.

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 19 दिसंबर

बिलावलु महला ५ ॥ प्रभ जनम मरन निवारि ॥ हारि परिओ दुआरि ॥ गहि चरन साधू संग ॥ मन मिसट हरि हरि रंग ॥ करि दइआ लेहु लड़ि लाइ ॥ नानका नामु धिआइ ॥१॥ दीना नाथ दइआल मेरे सुआमी दीना नाथ दइआल ॥ जाचउ संत रवाल ॥१॥ रहाउ ॥ संसारु बिखिआ कूप ॥ तम अगिआन.

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 18 दिसंबर

बिलावलु महला ५ ॥ सहज समाधि अनंद सूख पूरे गुरि दीन ॥ सदा सहाई संगि प्रभ अम्रित गुण चीन ॥ रहाउ ॥ जै जै कारु जगत्र महि लोचहि सभि जीआ ॥ सुप्रसंन भए सतिगुर प्रभू कछु बिघनु न थीआ ॥१॥ जा का अंगु दइआल प्रभ ता के सभ दास ॥ सदा सदा वडिआईआ नानक गुर.

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